दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी में बड़ी कार्रवाई, जिलाध्यक्ष और पूरी कार्यकारिणी भंग
दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी ने जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद क्या डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर भी एक्शन होगा, इसको लेकर सियासी हलचल तेज है।
भोपाल: दतिया विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को मिली करारी हार के बाद पार्टी के भीतर समीक्षा का दौर शुरू हुआ और इसके तुरंत बाद जिलाध्यक्ष से लेकर दतिया की पूरी कार्यकारिणी को भंग करने का बड़ा 'बुलडोजर एक्शन' देखने को मिला। इस सख्त कार्रवाई के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या इस एक्शन की आंच पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा तक भी पहुंचेगी? जिन लोगों पर गाज गिरी है, वे सभी नरोत्तम मिश्रा के करीबी समर्थक माने जाते हैं। इस कार्रवाई के ठीक तुरंत बाद नरोत्तम मिश्रा चुपचाप दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। बंद कमरे में हुई समीक्षा बैठक से छनकर जो खबरें बाहर आई हैं, उनके मुताबिक बैठक में नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों के खिलाफ जमकर शिकायतें की गई हैं।
हालांकि, कमराबंद बैठक में नरोत्तम समेत उनके समर्थकों की पोल खोलने वाले आशुतोष ने मीडिया से कहा कि सार्वजनिक जीवन में कुछ लिहाज रखे जाते हैं, लेकिन दतिया उपचुनाव के परिणामों के बाद से लेकर समर्थकों और सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या पार्टी अब नरोत्तम मिश्रा पर भी कोई कड़ा एक्शन लेगी?
⚡ समर्थकों का पार्टी से सफाया, अब क्या बड़ा कदम उठाएगी बीजेपी?
चुनाव नतीजे आने के महज 24 घंटे के भीतर ही बीजेपी संगठन ने दतिया की पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग करके साफ संदेश दे दिया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पार्टी जिन्हें इस चुनाव में अघोषित रूप से भीतरघात (गद्दारी) का जिम्मेदार मान रही है, क्या उन परोक्ष रूप से जुड़े कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा पर भी पार्टी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी?
हालांकि, इस तरह के किसी भी बड़े एक्शन से पहले पार्टी को खुद कई तीखे सवालों के जवाब देने होंगे। उदाहरण के लिए—जब टिकट कटने के बाद समर्थकों ने सड़कों पर चक्काजाम कर दिया था, तो आखिर पार्टी ने उन्हीं नरोत्तम मिश्रा को इस चुनाव में दोबारा सिरमौर (प्रमुख चेहरा) बनाने का जोखिम क्यों उठाया? जानकारी के मुताबिक, प्रदेश नेतृत्व इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट 'दिल्ली दरबार' को पहले ही भेज चुका है और अब जो भी अंतिम निर्णय होगा, वह केंद्रीय नेतृत्व के स्तर से ही लिया जाएगा।
✈️ दिल्ली रवाना हुए नरोत्तम मिश्रा, सफाई देंगे या सामने लाएंगे सच?
दतिया में अपने वफादार समर्थकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के ठीक बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। हालांकि, दतिया के चुनावी नतीजे आने के तुरंत बाद मध्य प्रदेश के दो अन्य कद्दावर नेताओं ने भी पिछले दो दिनों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दतिया उपचुनाव के नतीजे आते ही पीएम मोदी से मुलाकात की थी, और उनके बाद वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने भी दिल्ली पहुँचकर अमित शाह से लंबी चर्चा की। इन मुलाकातों को लेकर सियासी गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि ये सभी फीडबैक मीटिंग्स थीं।
इस पर वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रकाश भटनागर कहते हैं, "भारतीय जनता पार्टी की एक खास शैली रही है—जब आप यह सोच रहे होते हैं कि कोई बहुत बड़ा एक्शन होने वाला है, तब मुमकिन है कि कुछ भी न हो। असल में, नरोत्तम मिश्रा पर किसी भी तरह के एक्शन के असर बहुत गहरे हो सकते हैं। उन्हें केवल एक कारण बताओ नोटिस थमाया जा सकता है, या फिर कोई बड़ी कार्रवाई भी देखने को मिल सकती है। इस अप्रत्याशित (अनप्रिडेक्टिबल) पार्टी में पहले से कुछ भी पुख्ता तौर पर कहना मुश्किल है।"
🤐 नरोत्तम मिश्रा के सवाल पर कैसे बचते नजर आए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय?
इधर, नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटे जाने से लेकर उन पर लग रहे भीतरघात के अघोषित आरोपों तक, पार्टी के तमाम बड़े नेता इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर बोलने से लगातार बच रहे हैं। गुरुवार को जब प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भोपाल स्थित बीजेपी कार्यालय पहुँचे, तो उनसे पूछा गया कि क्या वजह है कि जमीनी कार्यकर्ताओं के तो इस्तीफे ले लिए गए, लेकिन बड़े नेताओं की जवाबदारी और जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो रही?
इस पर उनका साफ कहना था कि, "हमारी पार्टी एक कैडर-बेस्ड और बेहद अनुशासित पार्टी है। जो भी व्यक्ति पार्टी का अनुशासन तोड़ता है, संगठन उसके खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई करता है। हमारे प्रदेश अध्यक्ष ने पहले ही जांच समिति के गठन की घोषणा कर दी थी, और जिन लोगों ने भी अनुशासनहीनता की है, उनके खिलाफ नियमसम्मत कार्रवाई की गई है।"
जब उनसे विशेष रूप से नरोत्तम मिश्रा के बारे में पूछा गया कि जब टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों ने खुलकर प्रदर्शन किया था, तो पार्टी ने उन्हें दोबारा चुनाव प्रचार में आगे क्यों रखा? इस सवाल पर कैलाश विजयवर्गीय ने किनारा करते हुए कहा कि, "मैं इस व्यक्तिगत मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।"
🎯 सार्वजनिक जीवन के 'लिहाज' की बात कर क्या इशारे कर गए आशुतोष?
उधर, दतिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद बिना नाम लिए सीधे तौर पर नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले बीजेपी प्रत्याशी व नेता आशुतोष तिवारी से जब यह सवाल किया गया कि क्या उनके पास कोई ऐसा ऑडियो या वीडियो सबूत है, जिसकी उन्होंने पार्टी में आधिकारिक शिकायत की है?
इस पर आशुतोष ने जवाब देते हुए कहा कि, "वैसे तो यह पूरी तरह से एक काल्पनिक बात है, और भारतीय जनता पार्टी को इस तरह की चीजों की आवश्यकता कभी नहीं पड़ती।" इसके बाद उन्होंने रहस्य ढ़ंग से जोड़ा कि, "सार्वजनिक जीवन में कुछ अपने लिहाज होते हैं, और मैं उन मर्यादाओं को जीने का आदी हूँ तथा जीवनभर उनका पालन करता रहूँगा।"
जब उनसे आगे की भूमिका को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पार्टी के एक साधारण कार्यकर्ता थे और हमेशा एक समर्पित कार्यकर्ता ही बने रहेंगे।
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