23 सितंबर को 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात! उज्जैन वेधशाला से देख सकेंगे ये अद्भुत नजारा

23 सितंबर को खगोलीय घटना (Autumnal Equinox) के कारण दिन और रात बराबर होंगे। उज्जैन की जीवाजी वेधशाला के शंकु यंत्र से आप इस बदलाव को प्रत्यक्ष देख सकते हैं।

Sep 21, 2026 - 19:56
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23 सितंबर को 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात! उज्जैन वेधशाला से देख सकेंगे ये अद्भुत नजारा

उज्जैन। मध्य प्रदेश की धार्मिक और खगोलीय नगरी उज्जैन से एक बेहद दिलचस्प और ज्ञानवर्धक जानकारी सामने आई है। एक दुर्लभ और अद्भुत खगोलीय घटना (Autumnal Equinox) के कारण 23 सितंबर को दिन और रात की अवधि पूर्णतः बराबर होगी। यानी इस दिन करीब 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात दर्ज की जाएगी। इसके ठीक बाद, 24 सितंबर से दिन का उजाला धीरे-धीरे घटने लगेगा और रातें लंबी होनी शुरू हो जाएंगी। इस खगोलीय बदलाव का सीधा असर आने वाले महीनों में मौसम के मिजाज, तापमान और सूर्य की रोशनी की तीव्रता पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

☀️ सालभर क्यों बदलती दिखती है सूर्य की स्थिति: जानिए भूमध्य रेखा का विज्ञान

जीवाजी वेधशाला के प्रतिष्ठित अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने इस घटना के वैज्ञानिक पहलू को विस्तार से समझाया।

उन्होंने बताया, "चूंकि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक निश्चित कक्षा में परिक्रमा करती है, इसी वजह से सालभर हमें सूर्य की स्थिति बदलती हुई प्रतीत होती है। 23 सितंबर को सूर्य की किरणें ठीक भूमध्य रेखा (Equator) के ऊपर यानी पृथ्वी के बीचों-बीच लंबवत (Directly overhead) पड़ेंगी। इसी कारण दोनों गोलार्धों में दिन और रात का समय बिल्कुल समान हो जाता है। 24 सितंबर से शरद ऋतु (Autumn Season) का औपचारिक आगमन माना जाता है और रातें लंबी होने लगती हैं, जो प्रक्रिया 22 दिसंबर तक जारी रहती है।"

🔄 दक्षिणी गोलार्ध की ओर बढ़ेगा सूर्य: 22 दिसंबर को होगी सबसे लंबी रात

23 सितंबर के इस संपात (Equinox) के बाद सूर्य का आभासी संचलन दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) की ओर होने लगता है।

इसका सीधा प्रभाव उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में स्थित देशों और भारत जैसे क्षेत्रों पर पड़ता है। 24 सितंबर से उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं। साथ ही, सूर्य की किरणें सीधी न पड़कर तिरछी पड़ने लगती हैं, जिससे धूप का तेज और गर्मी कम महसूस होती है। यह खगोलीय चक्र लगातार जारी रहता है और अंततः 22 दिसंबर के आसपास उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है, जिसके बाद सूर्य पुनः उत्तरायण होने लगता है।

📐 उज्जैन वेधशाला का ऐतिहासिक 'शंकु यंत्र': छाया से ज्ञात होते हैं बारह राशियां और अक्षांश

उज्जैन की विश्व प्रसिद्ध जीवाजी वेधशाला में स्थापित प्राचीन 'शंकु यंत्र' पर सालभर होने वाले इस खगोलीय चक्र को सटीक रूप से अंकित किया गया है।

क्षितिज वृत्त के धरातल पर बने इस चबूतरे के ठीक मध्य में एक शंकु (Gnomon) लगा हुआ है, जिसकी परछाईं के आधार पर 7 मुख्य रेखाएं खींची गई हैं। ये रेखाएं आकाश की बारह राशियों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस यंत्र पर 22 दिसंबर (सबसे छोटा दिन), 21 मार्च व 23 सितंबर (दिन-रात बराबर) और 22 जून (सबसे बड़ा दिन) को चिन्हित किया गया है। दोपहर के समय शंकु की छाया की लंबाई और उसके कोण से किसी भी स्थान का अक्षांश (Latitude) और सूर्य के उन्नतांश सटीक रूप से मापे जा सकते हैं।

🔭 उज्जैन की वेधशाला में प्रत्यक्ष देखें बदलाव: छात्रों और शोधार्थियों के लिए विशेष अवसर

वेधशाला अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त के अनुसार, इस अद्भुत खगोलीय घटना को वेधशाला में मौजूद सदियों पुराने और प्रामाणिक यंत्रों के माध्यम से बेहद आसानी से देखा और समझा जा सकता है।

23 सितंबर को शंकु यंत्र पर पड़ने वाली सूर्य की छाया ठीक विषुवत रेखा की सीध में दिखाई देगी। इसके अतिरिक्त, वेधशाला के 'नाड़ी वलय यंत्र' में भी सूर्य के गोलार्ध परिवर्तन का स्पष्ट अंतर देखा जा सकेगा। 23 सितंबर को सूर्य दोनों तरफ समान दिखाई देगा और 24 सितंबर से इसके दक्षिणी भाग पर धूप पड़ना शुरू हो जाएगी। इस अनोखे वैज्ञानिक बदलाव का साक्षी बनने के लिए प्रतिवर्ष 23 सितंबर को बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक, स्कूली छात्र और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले शोधार्थी उज्जैन पहुँचते हैं।

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