डोसीगांव मल्टी से बेदखल परिवार सुलभ शौचालय में रहने को मजबूर, सामने आई दर्दनाक तस्वीर
रतलाम के डोसीगांव मल्टी से बेदखली के बाद एक गरीब परिवार बच्चों के साथ बंद पड़े सुलभ शौचालय में रहने को मजबूर है। नगर निगम की कार्रवाई के बाद का मामला।
रतलाम : रतलाम के डोसीगांव मल्टी के ईडब्ल्यूएस (EWS) आवासों से नगर निगम द्वारा की गई बेदखली की कार्रवाई के बाद गरीबों के सामने आए बेहद नारकीय और दर्दनाक हालात की तस्वीरें सामने आ रही हैं। फ्लैट से बेघर किए गए एक पीड़ित परिवार ने अपनी मजबूरी के चलते एक बंद पड़े सुलभ शौचालय में शरण ली है। बड़ी-बड़ी घास और कंटीली झाड़ियों से घिरे इस वीरान और बंद पड़े सुलभ शौचालय में यह परिवार अपने 3 छोटे-छोटे बच्चों के साथ रहने को मजबूर हो गया है।
📋 170 परिवारों से खाली कराए गए ईडब्ल्यूएस मकान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईडब्ल्यूएस फ्लैट की बकाया राशि जमा न कर पाने की वजह से नगर निगम ने चार दिन पूर्व लगभग 150 से अधिक परिवारों को इन मकानों से बेदखल कर दिया था। इस दौरान बारिश के मौसम को देखते हुए इन बेघर परिवारों को रैनबसेरों और नगर निगम के अन्य परिसरों में सुरक्षित आश्रय दिए जाने का दावा किया गया था। लेकिन, इस दावे की हकीकत तब सबके सामने आई जब एक भी बेघर परिवार नगर निगम द्वारा बनाए गए इन आश्रय स्थलों पर रहने के लिए नहीं पहुँचा, और मजबूरन एक परिवार को शौचालय को ही अपना आशियाना बनाना पड़ा।
🚽 बंद पड़े सुलभ शौचालय में कटी-फटी गृहस्थी बसाने को मजबूर परिवार
रतलाम-जावरा मुख्य मार्ग पर सड़क के किनारे बने एक पुराने और बंद पड़े सुलभ शौचालय को इस परिवार ने अपनी शरणस्थली बनाया है। चारों तरफ फैली सुनसान जगह, बड़ी-बड़ी घास और कंटीली झाड़ियों के बीच बने इस शौचालय में अनवर हुसैन और उसकी पत्नी नाजुल अपने तीन मासूम बच्चों के साथ दिन गुजार रहे हैं।
अनवर ने अपनी दर्दभरी दास्ताँ बताते हुए कहा, "हम नगर निगम की इस मल्टी में रहते थे, लेकिन अचानक हमें वहाँ से हटा दिया गया। जब हमारे पास रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं बची, तो बारिश से बचने के लिए हमने इस बंद पड़े सुलभ शौचालय की खुद साफ-सफाई करके यहाँ शरण ली है।"
💰 दो लाख रुपए की बड़ी रकम जुटाने में असमर्थ है गरीब परिवार
अनवर ने आगे बताया कि वह पेशे से एक ऑटो चालक है। ईडब्ल्यूएस फ्लैट के आवंटन के समय उसने 20,000 रुपए जमा करवाकर उसकी रसीद भी ली थी, लेकिन इसके बाद 1 लाख 80 हजार रुपए का बैंक लोन पास नहीं हो सका। एक साथ इतनी बड़ी रकम जमा करवाने की उसकी आर्थिक स्थिति बिल्कुल नहीं है, जिस वजह से उसे मजबूरन अपना आशियाना छोड़ना पड़ा।
नगर निगम द्वारा आश्रय स्थल की व्यवस्था किए जाने के दावों पर सवाल उठाते हुए अनवर ने कहा कि फ्लैट से बाहर निकालने के बाद निगम के कर्मचारी और अधिकारी अपने-अपने घर चले गए, और किसी ने भी उनकी सुध नहीं ली। बच्चों को इस मूसलाधार बारिश में खुले आसमान के नीचे तो नहीं रखा जा सकता था, इसलिए जो जगह मिली, वहीं साफ-सफाई करके रहने लगे।
🐍 जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा और प्रशासनिक दावे
अनवर की पत्नी नाजूल ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया, "जब बारिश नहीं होती है, तब हम सड़क के किनारे सोते हैं, और बारिश शुरू होने पर शौचालय के अंदर जाकर अपनी रात बिताते हैं। यहाँ बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे रात में मच्छर काटते हैं और हमेशा जहरीले जीव-जंतुओं (सांप-बिच्छू) का भी भारी खतरा बना रहता है। लेकिन इन बारिश के दिनों में अपने छोटे बच्चों को लेकर आखिर हम कहाँ जाएँ? इसलिए मजबूरी में हमें यहाँ रहना पड़ रहा है।"
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नगर निगम कमिश्नर अनिल भाना और महापौर प्रहलाद पटेल का कहना है कि हटाए गए सभी परिवारों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएँ की गई थीं, लेकिन कोई भी परिवार वहाँ आश्रय लेने के लिए नहीं पहुँचा।
🤝 समाजसेवियों ने बढ़ाई मदद के हाथ, शुरू हुई क्राउड फंडिंग
गौरतलब है कि करीब 7 साल पहले शिव शक्ति नगर के 400 झुग्गी-झोपड़ी वाले गरीब परिवारों को नगर निगम द्वारा बनाई गई ईडब्ल्यूएस आवास योजना की बिल्डिंगों में बसाया गया था। इनमें से 208 परिवारों ने 20 हजार रुपए की मार्जिन मनी भरी थी, जिसमें से अब तक केवल 30 परिवारों ने ही पूरी 2 लाख रुपए की राशि जमा कराई है। लगभग 170 परिवार ऐसे हैं जिन पर 1 लाख 80 हजार रुपए बकाया चल रहे हैं। कुछ दिन पहले जब नगर निगम की टीम नोटिस देने पहुँची थी, तो यहाँ भारी विरोध भी देखने को मिला था।
फिलहाल, इस सुलभ शौचालय में बेहद नारकीय और दयनीय स्थिति में रह रहे इस गरीब परिवार को देखकर शहर के कुछ संवेदनशील समाजसेवी मदद के लिए आगे आए हैं। 'नई शुरुआत' संस्था के हिम्मत जैथवार ने बताया कि बेदखल हुए इन परिवारों को लगातार भोजन और राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा समाजसेवी इमरान खोकर, इमरान ताज, रिजवान ताज, एजाज राठौर और रफीक भंडारी ने इस पीड़ित परिवार के लिए उचित रहने की व्यवस्था करने और सामाजिक स्तर पर क्राउड फंडिंग जुटाने का सराहनीय प्रयास शुरू कर दिया है।
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