भोपाल में संपन्न हुआ ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन, 'भोपाल घोषणा पत्र' को मिली मंजूरी
भोपाल में ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 का समापन हो गया है। बैठक में 'भोपाल घोषणा पत्र' को मंजूरी मिली, जिसके तहत कलाकारों की रजिस्ट्री और सांस्कृतिक सहयोग पर सहमति बनी है।
भोपाल: राजधानी भोपाल में पिछले चार दिनों से चल रहे भव्य ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया है। सम्मेलन के अंतिम दिन भारत समेत कुल 14 देशों के प्रतिनिधियों की एक उच्च-स्तरीय मंत्री स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें ऐतिहासिक 'भोपाल घोषणा पत्र' (Bhopal Declaration) को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई।
इस महत्वपूर्ण घोषणा पत्र के तहत कलाकारों के लिए एक स्वैच्छिक राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय रजिस्ट्री तैयार करने, सांस्कृतिक संपदाओं की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने, साझा विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने, संग्रहालयों और अभिलेखागार (Archives) के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने तथा रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा देने पर पूर्ण सहमति बनी है। यह पहली बार है जब ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक साझा सहयोग के लिए स्पष्ट समयबद्ध लक्ष्यों के साथ एक नया रोडमैप तैयार किया गया है।
🤝 ब्रिक्स देशों के कलाकारों को मिलेगा वैश्विक मंच और नई पहचान
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस अवसर पर जानकारी देते हुए बताया कि भारत के विशेष प्रस्ताव पर सभी साझेदार देशों ने एक स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री (Voluntary Artist Registry) बनाने पर अपनी सहमति जताई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों से जुड़े सभी कलाकारों, रचनाकारों और संस्कृति क्षेत्र के पेशेवरों को एक मंच पर आपस में जोड़ना है, ताकि उन्हें अन्य सदस्य देशों में भी काम करने के बेहतरीन अवसर मिल सकें। इससे विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के रिश्ते और अधिक स्थायी तथा मजबूत होंगे।
🏛️ चोरी होकर विदेश पहुँची प्राचीन धरोहरों की सुरक्षित वापसी पर जोर
भोपाल घोषणा पत्र में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया है कि सांस्कृतिक संपदाओं की वापसी यानी उनकी पुनर्प्राप्ति (Restitution) के लिए आपसी सहयोग को और अधिक बढ़ाया जाए। जो प्राचीन धरोहरें और कलाकृतियाँ अतीत में चोरी, तस्करी या अन्य अवैध माध्यमों से दूसरे देशों की सीमाओं तक पहुँच चुकी हैं, उनकी सही पहचान करने और उन्हें उनके मूल देशों में वापस लाने के साझा प्रयासों में सभी देश मिलकर काम करेंगे। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने स्पष्ट किया कि कोई भी सांस्कृतिक संपदा केवल अपनी आर्थिक कीमत तक सीमित नहीं होती, बल्कि उससे किसी भी समाज की गहरी भावनाएं और अमूल्य ऐतिहासिक विरासत जुड़ी होती है।
🌍 यूनेस्को की वैश्विक पहचान दिलाएगी साझा सांस्कृतिक विरासत
केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने आगे बताया कि इस घोषणा पत्र के माध्यम से बहुपक्षीय नामांकन की प्रक्रिया के जरिए साझा सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने पर भी पूरा जोर दिया गया है। यदि किसी ऐतिहासिक विरासत या परंपरा का संबंध एक से अधिक देशों से जुड़ा हुआ है, तो संबंधित सभी देश मिलकर उसके संयुक्त नामांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेंगे। इससे ब्रिक्स देशों की साझी विरासत को अंतरराष्ट्रीय फलक पर एक नई और मजबूत पहचान मिलने के रास्ते पूरी तरह से प्रशस्त होंगे।
📚 संग्रहालय, पुस्तकालय और अभिलेखागार अब आपस में जुड़ेंगे
इस उच्च-स्तरीय बैठक में यह भी तय किया गया कि विभिन्न देशों के संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के बीच दस्तावेजी विरासत, उनके डिजिटलीकरण और उनके संरक्षण के क्षेत्र में आपसी सहयोग को तेजी से बढ़ाया जाए। इससे इन प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच उच्चस्तरीय विशेषज्ञता और दुर्लभ संसाधनों का सुगम आदान-प्रदान संभव हो सकेगा। साथ ही, डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके सांस्कृतिक सामग्री को सुरक्षित रखने और उसे दुनिया के अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएंगे।
💰 रचनाकारों को मिलेगा उचित पारिश्रमिक और डिजिटल बाजार तक पहुँच
भोपाल घोषणा पत्र के अंतर्गत सृजनात्मक रचनाकारों के अधिकारों की सुरक्षा को भी सहयोग के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल किया गया है। वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणालियों के दौर में कॉपीराइट से सुरक्षित रचनाओं के इस्तेमाल में पूरी पारदर्शिता रखने और उनके रचनाकारों को उचित पारिश्रमिक (Fair Remuneration) सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी सभी ने सहमति जताई। इसके साथ ही, पारंपरिक कलाकारों, कुशल शिल्पकारों और अन्य रचनाकारों को सीधे आधुनिक डिजिटल बाजारों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
🌍 14 देशों के 55 प्रतिनिधियों ने लिया ऐतिहासिक बैठक में हिस्सा
इस महत्वपूर्ण मंत्री स्तरीय बैठक में भारत सहित कुल 14 देशों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें 10 मुख्य ब्रिक्स सदस्य और 4 विशेष साझेदार देश शामिल रहे। ब्रिक्स संस्कृति ट्रैक में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं, साझेदार देशों के रूप में बेलारूस, क्यूबा, कजाखस्तान और थाईलैंड के प्रतिनिधियों ने भी इस महासम्मेलन में भाग लिया।
🛕 विदेशी मेहमानों ने किया ऐतिहासिक नगरी सांची का भ्रमण
मंत्री स्तरीय बैठक के आधिकारिक समापन के बाद शनिवार को ब्रिक्स देशों के तमाम प्रतिनिधियों और विदेशी मेहमानों ने विश्व धरोहर स्थल सांची का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने भारत की प्राचीन, समृद्ध ऐतिहासिक बौद्ध कला और प्राचीन स्थापत्य कला का गहराई से आत्म-अनुभव किया।
विभिन्न देशों से आए इन डेलिगेट्स ने केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ जम्बू द्वीप पार्क और सांची के संग्रहालय का भी दौरा किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति राज्यमंत्री धर्मेंद्र लोधी भी विशेष रूप से उनके साथ मौजूद रहे। इस प्रतिनिधिमंडल में ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, यूएई, इंडोनेशिया और रूस समेत 10 सदस्य देशों के कुल 42 प्रतिनिधि शामिल थे।
💡 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग और मिलेट्स व्यंजनों ने मोहा मेहमानों का मन
सांची भ्रमण के दौरान विदेशी मेहमानों ने भगवान गौतम बुद्ध और महान सम्राट अशोक से जुड़े हुए प्राचीन अभिलेखों और उत्कृष्ट शिल्प कला की भूरी-भूरी प्रशंसा की। ब्रिक्स देशों से पधारे मेहमानों के स्वागत के लिए सांची में बेहद खास और भव्य इंतजाम किए गए थे।
यहाँ आगंतुकों को सांची के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराने के लिए बौद्ध संस्कृति पर आधारित एक विशेष '3डी प्रोजेक्शन मैपिंग' और आकर्षक 'लाइट एंड साउंड शो' का प्रदर्शन किया गया, जिसने सभी का मन मोह लिया। इसके अलावा, इस प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश के पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजनों जैसे 'कोदो-कुटकी मिलेट्स' (श्रीअन्न) के लजीज स्वाद का भी आनंद उठाया।
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