खरगोन के डोंगल्यापानी गांव में विकास गायब, जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण
खरगोन के वनांचल स्थित डोंगल्यापानी गांव के ग्रामीण आज भी पुल और सड़क न होने के कारण जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करने को विवश हैं। जानिए पूरी खबर।
खरगोन। विकासखंड के वनांचल क्षेत्र स्थित वन ग्राम धरमपुरी का डोंगल्यापानी गाँव आज भी प्रशासनिक दावों और विकास के लंबे-चौड़े नारों की पोल खोलता नजर आ रहा है। आजादी के इतने दशकों बाद भी यहाँ के ग्रामीण अपनी जान को हथेली पर रखकर उफनती कुंदा नदी को पार करने को विवश हैं।
हालात इतने बदतर हैं कि ग्रामीणों को पीपलझोपा तक पहुँचने के लिए एक ही नदी को बार-बार यानी कुल पाँच बार पार करना पड़ता है। जैसे ही वर्षाकाल शुरू होता है, यह गाँव चारों तरफ से पानी से घिरकर एक टापू में तब्दील हो जाता है। सबसे दर्दनाक और भयानक स्थिति तब बनती है जब गाँव में कोई बीमार हो जाता है या कोई गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से जूझती है। ऐसे समय में उन्हें अस्पताल पहुँचाने के लिए एंबुलेंस तो दूर की बात, चलने के लिए एक ढंग की पक्की सड़क तक नसीब नहीं होती है।
🩹 खटिया और झोली के सहारे उफनती नदी पार करने का जानलेवा जोखिम
गाँव के लोगों की मजबूरी ऐसी है कि स्वजन और ग्रामीण मिलकर मरीजों को लकड़ी की खटिया पर लेटाकर या कपड़े की झोली बनाकर इस उफनती हुई जानलेवा नदी को पार कराते हैं। इस दौरान उनकी जान पर हर पल खतरा मंडराता रहता है। गाँव के रहने वाले राकेश नार्वे ने बताया कि इस क्षेत्र में पक्के पुल और सड़क के निर्माण के लिए वे लंबे समय से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे हैं।
करीब दो साल पहले ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय खुद पहुँचकर सड़क निर्माण की माँग का ज्ञापन भी सौंपा था। इसके अलावा उनके पिता तूफानसिंह नार्वे ने क्षेत्रीय विधायक को भी लिखित आवेदन देकर पुल बनवाने की पुरजोर माँग की थी, लेकिन इन सबके बावजूद आज तक धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। डोंगल्यापानी, खरतिया फालिया और सूरया फालिया में रहने वाले लगभग 90 परिवारों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
🛤️ सीधे और कम लागत वाले रास्ते की भी हो रही है अनदेखी
धरमपुरी से होकर जाने वाला लगभग 10 किलोमीटर का एक वैकल्पिक रास्ता भी भारी बदहाली का शिकार है। उस रास्ते पर जाने के लिए भी ग्रामीणों को एक नदी और नाला पार करना पड़ता है, और पूरा मार्ग कच्चा तथा पथरीला है। ग्रामीणों का तर्क है कि इस 10 किमी लंबे मार्ग पर सड़क बनाने, घाट कटिंग और अन्य निर्माण कार्य कराने की तुलना में, यदि डोंगल्यापानी के सीधे रास्ते पर पुल-पुलिया बना दी जाए तो लागत काफी कम आएगी।
यदि यहाँ एक बार पुल बन जाता है, तो न केवल पीपलझोपा और भगवानपुरा मुख्यालय, बल्कि झिरन्या ब्लॉक के रायलबेड़ा, टांडावाड़ी और धुपा जैसे कई अन्य वनांचल गाँव भी सीधे बारहमासी सड़क मार्ग से जुड़ जाएंगे।
🏛️ प्रशासन का पक्ष: उच्च अधिकारियों को भेजे गए हैं प्रस्ताव
इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए विभागीय अधिकारियों का कहना है कि डोंगल्यापानी में कुंदा नदी पर पुल और पुलियाओं के निर्माण के प्रस्ताव पूर्व में भी उच्च स्तर पर भेजे जा चुके हैं। इस संबंध में अब एक बार फिर से स्मरण पत्र (Reminder) भेजा जाएगा, और जैसे ही प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त होगी, क्षेत्र में निर्माण कार्य तेजी से शुरू करा दिए जाएंगे।
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