रिश्वत की रकम मिलने मात्र से दोषसिद्धि नहीं, कोर्ट ने सहायक ग्रेड-2 को किया दोषमुक्त
जबलपुर की विशेष अदालत ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के एक मामले में महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रतिपादित करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल रकम मिलने से मांग साबित नहीं होती।
जबलपुर जिले से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला सामने आया है। यदि किसी मामले में अभियुक्त रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा जाए और उसके पास से रकम भी बरामद हो जाए, लेकिन अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहे कि आरोपित ने वास्तव में रिश्वत की मांग की थी, तो केवल रकम मिलने के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने इस महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुए सहायक ग्रेड-टू प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है।
📁 लोकायुक्त द्वारा रंगे हाथों पकड़ने और अभियोजन के आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, लोकायुक्त जबलपुर ने संभागीय उपायुक्त, वाणिज्य कर कार्यालय में पदस्थ प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को 2,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 'एसोसिएटेड इलेक्ट्रिकल एजेंसी, मुंबई' के अधिकृत प्रतिनिधि सुरेश कुमार गुप्ता से सेल्स टैक्स निर्धारण से संबंधित फाइल दिखाने और प्रस्तुत करने के एवज में यह रिश्वत मांगी थी।
🎙️ आवाज की पहचान प्रमाणित न होना और बचाव पक्ष के तर्क
बचाय पक्ष की ओर से पैरवी कर रही अधिवक्ता नम्रता के. अग्रवाल ने न्यायालय के समक्ष जोरदार तर्क रखे। उन्होंने दलील दी कि कथित तौर पर रिश्वत की मांग को लेकर पेश की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग में जो आवाज है, वह आरोपित की ही है, यह तथ्य पूरी तरह प्रमाणित नहीं हो सका है। इसके अलावा, शिकायतकर्ता और आरोपी पहले से एक-दूसरे से परिचित थे तथा दोनों के बीच पूर्व में विवाद भी हो चुका था। जिस फाइल को दिखाने के नाम पर रिश्वत मांगने का दावा किया जा रहा था, उससे संबंधित अपीलीय आदेश पहले ही संबंधित शासकीय जर्नल में प्रकाशित हो चुका था, जिसके कारण फाइल छिपाने या मांगने का कोई सवाल ही नहीं उठता था।
📜 पीसी एक्ट की धारा 20 और मांग साबित करने की अनिवार्यता
विशेष न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन (PC) एक्ट की धारा 20 के तहत कानूनी उपधारणा लागू होने के लिए केवल आरोपी के कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद होना ही पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को यह साबित करना अनिवार्य होगा कि आरोपी द्वारा किसी प्रकार के असम्यक लाभ (Undue Advantage) की मांग की गई थी। केवल मुद्रा या नोटों की बरामदगी से पीसी एक्ट की धारा-7 के तहत अपराध स्वतः सिद्ध नहीं माना जा सकता। पर्याप्त साक्ष्य और सबूतों के अभाव में न्यायालय ने आरोपी कर्मचारी को सम्मानजनक रूप से दोषमुक्त कर दिया।
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