जबलपुर में नर्मदा नदी में निकाली गई अनोखी तिरंगा यात्रा, उफनते पानी में 7 किमी तैरते हैं तैराक
जबलपुर में स्वतंत्रता दिवस पर नर्मदा नदी के उफनते पानी में 7 किलोमीटर की तिरंगा यात्रा निकाली गई। पिछले 18 साल से चली आ रही इस अनोखी यात्रा में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल होते हैं।
स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर पूरे देश में तिरंगे को लेकर जबरदस्त जोश और उत्साह देखने को मिलता है। आमतौर पर लोग सड़कों पर वाहन रैलियां या पैदल तिरंगा यात्रा निकालते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के जबलपुर में यह देशप्रेम एक अलग ही जुनून का रूप ले लेता है। यहाँ के कुछ जांबाज तैराक अपनी जान की परवाह किए बिना उफनती हुई नर्मदा नदी में लगभग 7 किलोमीटर तक तैरकर अनोखी तिरंगा यात्रा निकालते हैं। इस दौरान पानी के बीच से गूंजते 'भारत माता की जय' के नारे पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर देते हैं।
🏊♂️ 18 साल पुरानी परंपरा: जिलहरी घाट से तिलवारा घाट तक बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी लेते हैं हिस्सा
नर्मदा नदी में निकाली जाने वाली इस तिरंगा यात्रा के दौरान सभी तैराक अपने एक हाथ में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा थामे रखते हैं और तैरते हुए करीब 7 किलोमीटर लंबा सफर तय करते हैं। जबलपुर में बीते 18 वर्षों से यह परंपरा लगातार चली आ रही है। यह यात्रा शहर के जिलहरी घाट से शुरू होकर तिलवारा घाट पर समाप्त होती है। इसमें युवाओं के साथ-साथ बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस अनोखी यात्रा की शुरुआत सबसे पहले संजय यादव नाम के तैराक ने अपने कुछ साथियों के साथ की थी, जिनका हाल ही में निधन हो गया, इसलिए इस वर्ष यह यात्रा उनकी याद को समर्पित रही। अगस्त के महीने में जब नर्मदा नदी का प्रवाह तेज और जलस्तर काफी अधिक होता है, तब भी इन तैराकों का हौसला कम नहीं होता।
⛵ सुरक्षा के कड़े इंतजाम और पन्ना के पवई में केन नदी पर भी निकली तिरंगा यात्रा
नित्य तैराकी मंडल और जिला तैराकी संघ के अनुभव के कारण तैराक इस कठिन चुनौती को आसानी से पार कर लेते हैं। यात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं, जिसमें तैराकों के साथ सुरक्षा के लिए कई नावें चलती हैं ताकि आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। दूसरी ओर, पन्ना जिले के पवई जनपद के उमरहट में भी केन नदी पर एक भव्य बोट तिरंगा यात्रा निकाली गई। जनपद अध्यक्ष मोहिनी आनंद मिश्रा के नेतृत्व में उमरहट घाट से कुपना घाट तक बोटों पर सवार होकर नागरिकों ने तिरंगे लहराए, जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना को और अधिक मजबूत करना था।
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