Indore News: महिलाओं के हुनर का कमाल, 'यंत्रिका' इलेक्ट्रिक साइकिल एक बार चार्ज करने पर चलेगी 25 किमी
इंदौर की समान समिति की महिलाओं ने तैयार की 'यंत्रिका' इलेक्ट्रिक साइकिल। अब चूल्हा-चौका छोड़ ये महिलाएं बनीं मैकेनिक। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल।
इंदौर। इंदौर में महिलाओं का एक ऐसा समूह जो कभी केवल घर की चारदीवारी तक सीमित था, आज तकनीकी कौशल की नई मिसाल पेश कर रहा है। 'समान समिति' से जुड़ी इन महिलाओं ने 'यंत्रिका' नाम की एक इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार की है, जो एक बार चार्ज करने पर 25 किलोमीटर का सफर तय कर सकती है। यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम है।
चूल्हा-चौका से मोटर मैकेनिक तक का सफर
समान समिति उन बेसहारा और जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार से जोड़ती है जो आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं। संस्था के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए इन महिलाओं ने न केवल ड्राइविंग सीखी, बल्कि मोटर मैकेनिक और टू-व्हीलर मैकेनिक के रूप में खुद को स्थापित किया। आज ये महिलाएं बाकायदा अपना वर्कशॉप संचालित कर रही हैं, जहाँ सिर्फ महिला मैकेनिक ही टू-व्हीलर का रखरखाव करती हैं।
'यंत्रिका' इलेक्ट्रिक साइकिल: कम खर्च, ज्यादा सफर
संस्था के राजेंद्र बंधु बताते हैं कि वर्किंग महिलाओं को अपने गंतव्य तक जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसमें उनकी आमदनी का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता था। इसी समस्या को सुलझाने के लिए महिलाओं ने खुद साइकिल की बॉडी से लेकर मोटर और बैटरी तक इंस्टॉल कर 'यंत्रिका' का निर्माण किया है। इसकी अधिकतम गति 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ भविष्य की तैयारी
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लॉन्च की गई यह साइकिल किफायती और सुरक्षित है। फिलहाल, इसका निर्माण मुख्य रूप से संस्था से जुड़ी महिलाओं की सुविधा के लिए किया गया है। राजेंद्र बंधु ने कहा कि संस्था का प्रयास है कि इसकी कीमत न्यूनतम रखी जाए ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग भी इसका लाभ उठा सकें। बाजार में बिक्री के लिए इसकी कीमतों का ऐलान जल्द ही किया जाएगा।
हरित परिवहन की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर
पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण मुक्त परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में इंदौर की इन महिलाओं की यह पहल एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह केवल एक साइकिल का निर्माण नहीं है, बल्कि यह उन महिलाओं का आत्मविश्वास है जो समाज में अपनी नई पहचान बना रही हैं।
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