महाकालेश्वर मंदिर में हुई बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती, भांग और चांदी के मुकुट से हुआ श्रृंगार
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक और भांग, मुकुट से भव्य श्रृंगार किया गया।
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष पूजन और अलौकिक श्रृंगार किया गया। तड़के 3 बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में प्रवेश कर भगवान की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने 'जय श्री महाकाल' के जयकारों के साथ बाबा के इस दिव्य रूप के दर्शन किए और पुण्य लाभ कमाया।
🥛 पंचामृत से हुआ ज्योतिर्लिंग का महाभिषेक और महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पण
पट खुलने के बाद सबसे पहले भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, शुद्ध घी, शक्कर और ताजे फलों के रस से तैयार किए गए पंचामृत से ज्योतिर्लिंग का महाभिषेक किया गया। हरि ओम का जल चढ़ाने के बाद कपूर आरती संपन्न हुई। श्रृंगार प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज्योतिर्लिंग को पारंपरिक सूती वस्त्र से ढककर महानिर्वाणी अखाड़े के संतों द्वारा भगवान को भस्म अर्पित की गई। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार स्वरूप में आकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
🌸 भांग, त्रिपुंड, रुद्राक्ष और शेषनाग मुकुट से सजाया गया बाबा महाकाल का दरबार
भस्म आरती के पश्चात बाबा महाकाल का बेहद मनमोहक और भव्य श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग अर्पित कर मस्तक पर त्रिपुंड, त्रिशूल और डमरू से सजाया गया। इसके साथ ही उनके मस्तक पर चांदी का शेषनाग मुकुट, चांदी की मुंडमाल और रुद्राक्ष की विशेष माला धारण कराई गई। ज्योतिर्लिंग को मोगरे और गुलाब के सुगंधित फूलों की मालाओं से सुसज्जित किया गया और अंत में ताजे फलों व मिष्ठान का भोग लगाया गया। रविवार का दिन होने के कारण इस अद्भुत भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।
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