मध्य प्रदेश वन विभाग का बड़ा कदम: मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए अब आयोजित होंगे 'चरवाहा सम्मेलन'

मध्यप्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष घटाने के लिए वन विभाग का नवाचार। प्रदेश में पहली बार होंगे 'चरवाहा सम्मेलन'। 22.79 करोड़ के बजट को मिली मंजूरी।

Jun 10, 2026 - 19:57
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मध्य प्रदेश वन विभाग का बड़ा कदम: मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए अब आयोजित होंगे 'चरवाहा सम्मेलन'

भोपाल। मध्य प्रदेश के जंगलों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को थामने के लिए वन विभाग ने एक नई और जमीनी रणनीति बनाई है। प्रदेश में पहली बार क्षेत्रीय स्तर पर 'चरवाहा सम्मेलन' आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों के जरिए उन ग्रामीणों और चरवाहों को जागरूक किया जाएगा, जो अपने मवेशी चराने के लिए अक्सर संरक्षित वन क्षेत्रों के भीतर या उसके आसपास जाते हैं। उन्हें वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन और खुद की सुरक्षा के विशेष गुर सिखाए जाएंगे।

 टाइगर फाउंडेशन समिति की 22वीं बैठक में बड़ा निर्णय

यह महत्वपूर्ण निर्णय प्रमुख सचिव (वन) संदीप यादव की अध्यक्षता में 'मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति' की 22वीं बैठक में लिया गया। प्रमुख सचिव ने विभाग में पारदर्शिता और कार्य की गति सुनिश्चित करने के लिए हर तीन महीने में इस बैठक को अनिवार्य कर दिया है। बैठक में कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच सहित राज्य के प्रमुख टाइगर रिजर्वों के संचालक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

 22.79 करोड़ के बजट से संवरेगा वन्यजीवों का भविष्य

समिति ने वन्यजीव सुरक्षा और आवास विकास के लिए 22.79 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों में होगा:

  • संघर्ष नियंत्रण: आधुनिक तकनीक और स्थानीय जागरूकता के जरिए इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव को कम करना।

  • ब्लैक बक रेस्क्यू: काले हिरणों के संरक्षण और उनके सुरक्षित स्थानांतरण के लिए विशेष ऑपरेशन।

  • रिसर्च और ट्रेनिंग: वन्यजीवों के व्यवहार पर वैज्ञानिक अध्ययन और वन अमले को आधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाना।

 वार्षिक कार्ययोजना को हरी झंडी

बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक कार्ययोजना (Annual Action Plan) को भी मंजूरी दे दी गई है। वन बल प्रमुख सुभरंजन सेन, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा, टाइगर सेल के अध्यक्ष (ADG) और एनटीसीए के सदस्य सचिव की उपस्थिति ने इस योजना को मजबूती प्रदान की है। उम्मीद है कि यह जमीनी स्तर का प्रयास प्रदेश के वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों के बीच एक सह-अस्तित्व का नया दौर शुरू करेगा।

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