अचलेश्वर महादेव मंदिर का संचालन अब जिला प्रशासन के हाथों में, दानपेटियां सील
ग्वालियर के अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास का संचालन अब जिला प्रशासन के पास आ गया है। कोर्ट के आदेश पर दानपेटियां सील कर दी गई हैं और चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी।
ग्वालियर के प्रसिद्ध अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास का संचालन अब पूरी तरह से जिला प्रशासन के नियंत्रण में आ गया है। रविवार को जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने अचलनाथ दरबार पहुंचकर करीब तीन घंटे तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मंदिर के रिकॉर्ड से लेकर दानपेटियों तक की पूरी जानकारी जुटाई। प्रशासन ने सभी दानपेटियों को अपनी विशेष सील से बंद कर दिया है, जिन्हें अब प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में ही खोला जाएगा। एडीएम सीबी प्रसाद और लश्कर एसडीएम नरेंद्रबाबू यादव सहित अन्य अधिकारियों ने पूर्व व्यवस्थापकों से भी विस्तृत चर्चा की है। अब आगामी चुनाव संपन्न होने तक पंजीयक लोक न्यास के मार्गदर्शन में ही सारी व्यवस्थाएं संचालित की जाएंगी।
⚖️ कोर्ट का बड़ा आदेश: बैंक खातों और दान की निगरानी अब प्रशासन के पास
अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास के संचालन और चुनाव को लेकर चल रहे लंबे विवाद में ग्वालियर के नवम जिला न्यायाधीश की अदालत ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने मंदिर परिसर में आने वाले चढ़ावे, दान और न्यास के सभी बैंक खातों की निगरानी सीधे जिला प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने उच्च न्यायालय के 15 जून 2026 के आदेश का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि मंदिर में निष्पक्ष और शीघ्र चुनाव कराया जाना अत्यंत आवश्यक है। इस अंतरिम व्यवस्था के तहत मंदिर के सभी बैंक खाते सक्षम अधिकारियों की निगरानी में चलेंगे और आय-व्यय का पूरा हिसाब लेखा पुस्तिका में दर्ज किया जाएगा।
🔍 पारदर्शी व्यवस्था और हर 15 दिन में कोर्ट को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
न्यायालय के निर्देशानुसार, मंदिर परिसर में प्रतिदिन आने वाला दान केवल दान पेटियों में ही एकत्र किया जाएगा और उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ही सील या खोला जाएगा। याचिकाकर्ता संतोष राठौर ने उम्मीद जताई है कि इन नए प्रशासनिक कदमों से अचलेश्वर मंदिर की व्यवस्थाएं जल्द ही और अधिक बेहतर होंगी। अदालत ने लोक न्यास पंजीयक और कलेक्टर ग्वालियर को यह भी निर्देश दिए हैं कि मंदिर के लेखा-जोखा से जुड़ी रिपोर्ट हर 15 दिन में अदालत और पक्षकारों के समक्ष प्रस्तुत की जाए। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रशासन और पुलिस के अधिकारी नियमित रूप से मंदिर की व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे।
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