कांग्रेस का 'लाइव ड्रामा': मीनाक्षी नटराजन मामले के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर, भाजपा ने लिए मजे
मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह उजागर। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरीश चौधरी ने दिग्विजय सिंह को रोका, तो जीतू-उमंग के बीच हुई माइक के लिए तनातनी।
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद उपजा गुस्सा अब पार्टी के भीतर ही विस्फोट बनकर फूट रहा है। बंद कमरों की गुटबाजी अब सरेआम मीडिया कैमरों के सामने आ गई है, जहाँ दिग्गज नेता एक-दूसरे के आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।
सीन 1: प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'राजा साहब' की अनदेखी
नामांकन निरस्त होने के बाद पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, मीनाक्षी नटराजन और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह मीडिया को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान दिग्विजय सिंह ने अधिवक्ता जेपी धनोपिया को बोलने का इशारा किया, तो प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने तल्ख लहजे में कहा, "अब रहने दीजिए, हमें अपने हिसाब से करने दीजिए।" इस अप्रत्याशित व्यवहार से दिग्विजय सिंह सन्न रह गए और तंजिया अंदाज में हाथ जोड़कर खामोश हो गए। बाद में मिन्नतों के बावजूद वे बोलने को तैयार नहीं हुए।
सीन 2: धरने पर भी 'पासिंग द पार्सल' का खेल
रात 11:30 बजे जब धरना समाप्त हुआ, तो मीडिया ने कांग्रेस नेताओं से अगली रणनीति पूछी। यहाँ भी गुटबाजी का खेल देखने को मिला। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने माइक नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर बढ़ाते हुए कहा, "उमंग, इन्हें बता दो।" वहीं उमंग सिंघार ने भी पलटवार करते हुए कहा, "जीतू, तुम ही बता दो!" नेताओं के इस तमाशे को देखकर वहां मौजूद कार्यकर्ता भी हतप्रभ रह गए।
चरम पर अंतर्कलह, भाजपा को मिला मौका
पार्टी के भीतर यह मनमुटाव अब किसी से छिपा नहीं है। पूर्व विधायक पुरुषोत्तम दांगी का 'फिक्सिंग' का आरोप हो या नरेश ज्ञानचंदानी का इस्तीफा—कांग्रेस का आंतरिक संकट गहराता जा रहा है। इस खींचतान को देखकर भाजपा की सोशल मीडिया विंग ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा ने इन वायरल वीडियो को 'कांग्रेस की बिखरी हुई स्थिति' करार देते हुए तीखे कटाक्ष किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मीनाक्षी नटराजन का मामला केवल एक बहाना है, असली लड़ाई पार्टी की कमान और लीडरशिप की है जो अब बेहद हिंसक रूप ले चुकी है।
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