मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की असामान्य बिक्री पर सरकार सख्त, 15 पेट्रोल पंप जांच के दायरे में
मध्य प्रदेश में ईंधन की असामान्य बिक्री के बाद सरकार अलर्ट। भोपाल समेत कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर बढ़ी डीजल की मांग, पेट्रोलियम मंत्रालय ने जांच के दिए निर्देश।
भोपाल। मध्य प्रदेश में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की बिक्री में हुई अचानक और असामान्य बढ़ोतरी ने राज्य सरकार और तेल कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद अब पूरे प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रारंभिक जांच में अकेले भोपाल के 15 से अधिक पेट्रोल पंप संदेह के घेरे में हैं, जहाँ मई 2026 में पिछले साल की तुलना में डीजल की बिक्री 95 से लेकर 1000 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
रिटेल पंपों से बल्क खरीद का संदेह
स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर (ऑयल इंडस्ट्री) की रिपोर्ट के अनुसार, इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण औद्योगिक और बल्क उपभोक्ताओं द्वारा रिटेल पंपों का उपयोग करना है। जो उपभोक्ता तेल कंपनियों से सीधे महंगा टैंकर खरीदने के बजाय पेट्रोल पंपों से सस्ता ईंधन खरीद रहे हैं, वे इस गड़बड़ी की मुख्य वजह हैं। इसके अलावा, भविष्य में सप्लाई को लेकर आशंका और जमाखोरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
कड़ी कार्रवाई और विशेष चेकिंग अभियान
पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल के निर्देशानुसार, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सक्रिय हो गया है। कलेक्टरों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे औद्योगिक कॉरिडोर और परिवहन क्षेत्रों के संवेदनशील पेट्रोल पंपों की जांच करें। इस जांच में खाद्य विभाग, राजस्व, नापतौल और तेल कंपनियों के अधिकारी संयुक्त रूप से शामिल होंगे। अनियमितता पाए जाने पर सीधे आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
डीलर्स एसोसिएशन का पक्ष
उधर, पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने इस कार्रवाई पर अपना विरोध जताया है। एसोसिएशन का कहना है कि "डिमांड के अनुसार बिक्री करना कोई अपराध नहीं है।" अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और तेल कंपनियों के इस संयुक्त अभियान के बाद राज्य में ईंधन के अवैध वितरण और जमाखोरी पर कितना अंकुश लग पाता है।
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