'हनुमान जी का भक्त हूं, राम मंदिर में चोरी से लगा आघात', जानें धीरेंद्र शास्त्री ने और क्या कहा

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी पर बाबा बागेश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कड़ी नाराजगी जताई है। जानें उन्होंने क्या कहा।

Aug 19, 2026 - 18:55
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'हनुमान जी का भक्त हूं, राम मंदिर में चोरी से लगा आघात', जानें धीरेंद्र शास्त्री ने और क्या कहा

अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर (Ram Mandir) में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर इन दिनों देशभर में चर्चा तेज है। इसी मुद्दे पर जब बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने गहरी नाराजगी और दुख व्यक्त किया।

बाबा बागेश्वर ने कहा कि जब उन्हें इस घटना की जानकारी मिली तो उनके हृदय को गहरा आघात लगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भगवान के दरबार में चढ़ावे की चोरी होना सबसे बड़ा कलंक है। फिलहाल विशेष जांच टीम (SIT) इस पूरे मामले की जांच कर रही है और दोषियों को भगवान सजा जरूर देंगे।

🛕 'मैं राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान का भक्त हूं': भावनात्मक रूप से आहत हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री

प्रतिक्रिया और भावनात्मक जुड़ाव:

  • हनुमान जी के भक्त: बाबा बागेश्वर ने कहा कि वे प्रभु श्री राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान जी के सेवक हैं, इसलिए राम मंदिर से जुड़ी हर बात से उनका सीधा भावनात्मक जुड़ाव है।

  • निंदनीय कृत्य: उन्होंने चढ़ावे की चोरी को बेहद निंदनीय करार देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से चढ़ाए गए धन या सामग्री पर बुरी नजर डालना किसी भी सूरत में उचित नहीं है।

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कड़ा रुख और चेतावनी:

"पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने चढ़ावा चोरी करने वालों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग भगवान के मंदिर के चढ़ावे पर हाथ डालते हैं, उनकी निश्चित रूप से लंका लगेगी और उनका सर्वनाश होगा। उन्होंने कहा कि इंसान भले ही कुछ न देख पाए, लेकिन ईश्वर की नजरों से कुछ नहीं छिप सकता। गलत काम करने वालों को उनके कर्मों का दंड अवश्य मिलेगा।"

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आदर्श और मर्यादा पर जोर:

  • मर्यादा का उल्लंघन: धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि प्रभु राम का जीवन मर्यादा, सत्य और आदर्शों का प्रतीक है। ऐसे पवित्र स्थान पर चोरी होना बेहद गंभीर और दुखद विषय है।

  • श्रद्धा का प्रतीक: श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई और अटूट आस्था से मंदिर में दान-चढ़ावा अर्पित करते हैं। यह केवल पैसा या सामान नहीं बल्कि उनकी निष्ठा होती है।

  • स्वीकार्य नहीं: उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मंदिर की संपत्ति या श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या चोरी को कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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