छापरी प्राथमिक शाला के बच्चों का भविष्य दांव पर, जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
बड़वानी के ग्राम छापरी स्थित प्राथमिक विद्यालय में जर्जर शौचालय और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से छात्र परेशान हैं। ग्रामीणों ने शिक्षा के स्तर और व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल।
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के अंजड़ नगर के पास स्थित ग्राम छापरी की प्राथमिक शाला इन दिनों अपनी बदहाल व्यवस्थाओं और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि इस विद्यालय में अध्ययनरत नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाएं तक मय्यड़ नहीं हो पा रही हैं। इस पूरी व्यवस्था में सबसे खतरनाक स्थिति बालकों के शौचालय की है, जो लंबे समय से पूरी तरह से क्षतिग्रस्त और जर्जर हालत में पड़ा हुआ है। इस वजह से छोटे-छोटे छात्रों को शौच के लिए खुले में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इसे बच्चों की गरिमा, उनके स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा एक बेहद गंभीर विषय बताते हुए जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर उचित कदम उठाने की मांग की है।
⚠️ स्वच्छता और सुरक्षा पर बड़े सवाल, खुले में शौच जाने को मजबूर मासूम छात्र
ग्राम छापरी के इस प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पहली से लेकर पांचवीं तक कुल 49 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 35 बालिकाएं और 14 बालक शामिल हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए बताया कि विद्यालय में बालकों के लिए बना शौचालय लंबे समय से उपयोग के काबिल नहीं बचा है, क्योंकि उसकी दीवारें और छत पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। इसके अलावा, स्कूल परिसर के भीतर शराब की खाली बोतलें फेंकी मिलने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जो विद्यालय जैसी पवित्र जगह की स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था पर बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े करती हैं। ग्रामीण रामेश्वर सिंह ने बताया कि छोटे बच्चों को रोजाना किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। स्कूल परिसर पूरी तरह बच्चों के अनुकूल होना चाहिए, लेकिन यहां बरसों से जरूरी सुविधाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
📚 जर्जर भवन और कमजोर होती शिक्षा की नींव, डीपीसी ने कही निरीक्षण की बात
विद्यालय की जर्जर इमारत और खराब शैक्षणिक माहौल को लेकर भी ग्रामीणों में भारी रोष है। उनका कहना है कि रखरखाव के अभाव में बच्चों के लिए पढ़ाई का उचित और सुरक्षित माहौल तैयार नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने शिक्षा की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि पांचवीं कक्षा तक पहुंच चुके कई बच्चों को हिंदी के सामान्य स्वर-व्यंजन और अंग्रेजी की एबीसीडी तक का ठीक से ज्ञान नहीं है। नियमित मॉनिटरिंग के अभाव में पढ़ाई का स्तर गिरता जा रहा है।
दूसरी ओर, विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों का कहना है कि भवन और शौचालय की जर्जर स्थिति की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को पहले ही दी जा चुकी है। इस पूरे मामले पर जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) सोनालिका अचाले का कहना है कि उन्हें इस विद्यालय की समस्या की पूर्व में कोई जानकारी नहीं थी, वे जल्द ही खुद विद्यालय का निरीक्षण करेंगी और वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के बाद उचित कार्रवाई करेंगी। अब देखना यह होगा कि इन 49 मासूमों को जर्जर व्यवस्थाओं से कब मुक्ति मिलती है।
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