चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले भारत-चीन सीमा विवाद पर होगी अहम उच्चस्तरीय चर्चा
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन के दौरे पर हैं, जहां वे चीनी समकक्ष वांग यी के साथ सीमा विवाद और एलएसी पर शांति को लेकर 25वें दौर की वार्ता करेंगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंच रहे हैं, जहां वे अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर 'स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स' (SR) मैकेनिज्म के तहत महत्वपूर्ण बातचीत में हिस्सा लेंगे। दोनों देशों के बीच मंगलवार को एसआर वार्ता का यह 25वां दौर होने जा रहा है। कूटनीतिक हलकों में इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह बातचीत ऐसे समय पर हो रही है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगामी 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) समिट के लिए भारत आने की संभावना है। हालांकि शी जिनपिंग के दौरे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक (ऑफिशियल) पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी उनके इस दौरे को लेकर खासी उम्मीदें लगाए हुए हैं।
🤝 एलएसी पर सैन्य तनाव कम करने और डिसइंगेजमेंट पर रहेगा मुख्य फोकस
पीटीआई न्यूज के अनुसार, यह उच्चस्तरीय बातचीत ऐसे नाजुक समय पर हो रही है जब भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव को पूरी तरह से कम करने और सैन्य टकराव की संभावनाओं को समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। गौरतलब है कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों पड़ोसी देशों के कूटनीतिक और द्विपक्षीय रिश्ते काफी निचले स्तर पर चले गए थे, जिसके बाद भारत और चीन दोनों ने पूर्वी लद्दाख सेक्टर में भारी संख्या में अतिरिक्त सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती कर दी थी। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, जिसका मुख्य उद्देश्य एलएसी से सैनिकों की वापसी (डिसइंगेजमेंट) और सीमावर्ती इलाकों में स्थाई शांति व स्थिरता सुनिश्चित करना रहा है।
🗺️ अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावों को भारत ने नकारा, सीमा पर शांति को बताया सबसे बड़ी शर्त
विशेष प्रतिनिधि मैकेनिज्म भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का एक राजनीतिक और शांतिपूर्ण हल निकालने के लिए बनाया गया सबसे प्रमुख फोरम है। हाल ही में अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीन की सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा था कि सीमा पर हालात आम तौर पर स्थिर हैं और दोनों देश कूटनीतिक व सैन्य चैनलों के माध्यम से संपर्क बनाए हुए हैं।
दूसरी ओर, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत चीन के साथ सीमा मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और एलएसी पर शांति बनाए रखना सबसे जरूरी है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के आपसी रिश्तों की दिशा तय करती है। भारत ने अरुणाचल प्रदेश में विभिन्न स्थानों के नाम बदलने के बीजिंग के तथाकथित फैसलों को सिरे से खारिज करते हुए दो टूक कहा है कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहा है, है और आगे भी रहेगा। डोभाल और वांग यी की इस बैठक में सीमा प्रबंधन, सैनिकों की तैनाती और द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की पूरी उम्मीद है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)