मध्य प्रदेश के बांधों में पानी की स्थिति चिंताजनक, आधे से ज्यादा जलाशय अभी भी खाली
मध्य प्रदेश में मानसून का आधा सीजन बीतने के बाद भी प्रदेश के कई बड़े बांध आधे खाली हैं। मौसम विभाग ने अगले 10 दिनों में अच्छी बारिश की उम्मीद जताई है।
मध्य प्रदेश में इस बार बारिश के मौसम का आधा समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश के लगभग आधे बांधों का पेट अभी तक आधा भी नहीं भर पाया है। राज्य के 54 प्रमुख जलाशयों में से 23 से ज्यादा जलाशय अभी ऐसे हैं जो आधे या उससे भी ज्यादा खाली पड़े हैं। इनमें तवा, इंदिरा सागर डैम, बाणसागर, बानसुजारा और पेंच डायवर्जन जैसे बड़े और महत्वपूर्ण बांध शामिल हैं, जो अभी मुश्किल से आधे ही भर पाए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले 10 दिनों के दौरान प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हुई अच्छी बारिश से कई बांधों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
⚡ बरगी डैम के जल्द खुल सकते हैं गेट, ओंकारेश्वर और अन्य बड़े बांधों पर असर
पिछले कुछ दिनों में जबलपुर, मंडला और सिवनी के कैचमेंट एरिया में हुई अच्छी बारिश से बरगी डैम का जलस्तर काफी तेजी से बढ़ा है। कुछ समय पहले बरगी डैम का पानी अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन अब यह लगभग 80 प्रतिशत तक भर चुका है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि पानी की आवक इसी तरह बनी रही तो अगले एक-दो दिनों में बरगी बांध के कुछ गेट खोले जा सकते हैं। बरगी से छोड़े जाने वाला पानी नरसिंहपुर, होशंगाबाद होते हुए ओंकारेश्वर और सरदार सरोवर बांध तक पहुंचता है, जिससे निचले इलाकों के बांधों के भी जल्द भरने की उम्मीद है। हालांकि, तवा, बाणसागर, इंदिरा सागर और पेंच डायवर्जन जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स अभी भी अपनी क्षमता से काफी नीचे चल रहे हैं, जिससे सिंचाई और बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
☔ अगले 10 दिन हैं मानसून के लिए 'गोल्डन टाइम', झमाझम बारिश की उम्मीद
मौसम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश के लिहाज से आने वाले 10 दिन मानसून के मोर्चे पर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे पश्चिमी बंगाल-उत्तरी ओडिशा तट पर एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) सक्रिय हुआ है, जिसके प्रभाव से प्रदेश के लगभग सभी संभागों में आगामी दिनों में अच्छी बारिश की संभावना है। वर्तमान में राज्य में औसत बारिश का कोटा करीब 11 फीसदी कम चल रहा है, जिसमें पूर्वी एमपी में 17% और पश्चिमी एमपी में 6% की कमी दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नए वेदर सिस्टम के सक्रिय होने से बारिश के इस आंकड़े में तेजी से सुधार होगा और खाली पड़े जलाशयों में पानी की पर्याप्त आवक हो सकेगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)