भोर से ही महाकाल मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर निकली बाबा की सवारी
सावन के अंतिम सोमवार पर उज्जैन में बाबा महाकाल की भव्य सवारी निकाली गई। चांदी की पालकी में सवार महाकाल ने चार अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन दिए।
पवित्र सावन मास के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर धर्म नगरी उज्जैन में बाबा महाकाल की भव्य और परंपरागत सवारी पूरे ठाट-बाट के साथ नगर भ्रमण पर निकली। तड़के रात ढाई बजे ही मंदिर के पट खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं और सुबह होते-होते महाकाल मंदिर परिसर में भक्तों का विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। अलसुबह विधिवत पूजन-अर्चन के ठीक बाद, सुबह 4 बजे भगवान महाकाल चांदी की पालकी में विराजित होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण के लिए रवाना हुए। सवारी के निकलते ही पूरा उज्जैन शहर 'हर-हर महादेव' और बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा और हर तरफ एक अद्भुत भक्तिमय माहौल नजर आया।
✨ चार अलग-अलग स्वरूपों में उमड़ी भक्तों की आस्था, दूर होते हैं जीवन के कष्ट
मंदिर के पुजारी महेश पुजारी के अनुसार, सावन का महीना भगवान महाकाल की आराधना के लिए सर्वोपरि माना गया है। ऐसी गहरी मान्यता है कि इस पावन काल में बाबा खुद अपनी प्रजा का हाल जानने शहर की सड़कों पर निकलते हैं और इस दौरान उनकी एक झलक पा लेना भी अत्यंत पुण्यकारी होता है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि महाकाल के दर्शन मात्र से जीवन के समस्त रोग, भय, बाधाएं और संकट स्वतः ही दूर हो जाते हैं। इस अंतिम सोमवार की सवारी की सबसे खास बात यह रही कि बाबा महाकाल ने कुल चार अलग-अलग स्वरूपों में अपने भक्तों को दर्शन दिए:
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चंद्रमोलेश्वर स्वरूप – चांदी की पालकी में
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मनमहेश स्वरूप – हाथी पर विराजमान होकर
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शिव तांडव – गरुड़ पर आसीन होकर
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उमा महेश – नंदी रथ पर सवार होकर
🌿 जनसैलाब के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश, पारंपरिक मार्ग से गुजरी सवारी
देश के कोने-कोने से पहुँचे हजारों श्रद्धालुओं ने घंटों कतारों में खड़े रहकर भगवान की एक झलक पाई। महाकाल मंदिर से शुरू होकर यह सवारी गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, कहारवाड़ी, रामघाट, रामानुजकोट, कार्तिक चौक, छत्री चौक और गोपाल मंदिर जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस मंदिर पहुँची। मार्ग में जगह-जगह भक्तों ने पुष्पवर्षा कर बाबा का स्वागत किया। इसके साथ ही, इस अंतिम सवारी के दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संदेश देते हुए श्रद्धालुओं में 11,000 पौधों का वितरण भी किया गया, जिससे आस्था के इस महापर्व पर प्रकृति संरक्षण का संदेश भी जन-जन तक पहुँचाया जा सके।
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