मध्य प्रदेश में फर्जीवाड़े की बाढ़, सीएम के फर्जी लेटरहेड और फर्जी वकालतनामा से मचा हड़कंप
मध्य प्रदेश में फर्जी लेटरहेड से ट्रांसफर कराने और हाईकोर्ट में फर्जी वकालतनामा लगाकर केस वापस लेने के गंभीर मामले सामने आए हैं। पुलिस और कोर्ट ने जांच शुरू कर दी है।
मध्य प्रदेश में इन दिनों फर्जीवाड़े के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि अब अपराधियों द्वारा फर्जी लेटरहेड, फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर से लेकर फर्जी वकालतनामा तक धड़ल्ले से तैयार किए जा रहे हैं। हालिया घटनाओं ने पुलिस, शासन-प्रशासन और यहाँ तक कि न्यायपालिका (कोर्ट) को भी गहरी चिंता में डाल दिया है। एक तरफ जहाँ आलीराजपुर जिले में मुख्यमंत्री के फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल कर सरकारी अधिकारी का ट्रांसफर कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान फर्जी वकालतनामा लगाकर अपील को चुपचाप वापस लेने का शातिर प्रयास किया गया। इन दोनों ही गंभीर मामलों को संज्ञान में लेते हुए प्रशासन और अदालत ने कड़ी जाँच बिठा दी है, जो भविष्य की बड़ी सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियों की ओर इशारा करती हैं।
📝 आलीराजपुर में सीएम के फर्जी लेटरहेड से CMHO को भेजा गया ट्रांसफर आदेश, आरोपी गिरफ्तार
इस फर्जीवाड़े का पहला मामला आलीराजपुर जिले से सामने आया है, जहाँ प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम का फर्जी लेटरहेड जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राजेश अतुलकर के पास पहुँचा। गत 21 जुलाई को भेजे गए इस पत्र में आयुष अधिकारी निर्मला निगवाल का तबादला उदयगढ़ से सोंडवा करने के फर्जी आदेश का उल्लेख था। मामले की नजाकत भांपते हुए सीएमएचओ समझ गए कि यह आदेश फर्जी है, जिसके तुरंत बाद उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रकरण दर्ज किया और फर्जी पत्र भेजने वाले मुख्य आरोपी मुकेश (पिता रामसिंह भोंसले, निवासी श्यामापुरा, सीहोर) को गिरफ्तार कर लिया। एसपी रघुवंश सिंह भदौरिया के अनुसार, आरोपी के पास से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस्तेमाल में प्रयुक्त मोबाइल और टैबलेट भी जब्त किए गए हैं। शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने विद्युत विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग को भी इसी तरह के फर्जी लेटरहेड भेजे थे।
🏛️ हाईकोर्ट में फर्जी वकालतनामा लगाकर अपील वापस लेने की साजिश, ओथ रजिस्टर जब्त करने के निर्देश
दूसरी ओर, दूसरा बेहद गंभीर मामला सीधे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से जुड़ा है। यहाँ एक याचिका की सुनवाई के दौरान शातिर तरीके से फर्जी वकालतनामा लगाकर एक अपील को वापस कराने का प्रयास किया गया। यह पूरा मामला भोपाल निवासी एक महिला की अपील से संबंधित है, जो जिला अदालत के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान जब मूल अपीलकर्ता महिला और उनके अधिकृत अधिवक्ता एस.पी. मिश्रा कोर्ट में उपस्थित हुए, तो उन्होंने अदालत को स्पष्ट बताया कि उन्होंने अपील वापस लेने के लिए ऐसी कोई याचिका दायर ही नहीं की है। इसके बाद कोर्ट में दाखिल उस याचिका के पूरी तरह फर्जी होने का भंडाफोड़ हुआ। मामले को अत्यंत संगीन मानते हुए जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने ओथ कमिश्नर को तलब किया, जिन्होंने पुष्टि की कि वकालतनामा बनवाने कोई अन्य महिला और पुरुष आए थे, जो असली अपीलकर्ता नहीं थे। हाईकोर्ट ने वकालतनामा को पूरी तरह फर्जी करार देते हुए न्यायिक रजिस्ट्रार को 4 सप्ताह के भीतर गहन जाँच करने और यदि आपराधिक कृत्य की पुष्टि होती है, तो तत्काल एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
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