पेड़ों की कटाई और पर्यावरण असंतुलन पर HC सख्त, नीमच के याचिकाकर्ता को मिली अनोखी सजा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पर्यावरण से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को 25 फलदार वृक्ष लगाने और उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पर्यावरण और प्रकृति से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान एक बेहद अनूठा और सराहनीय आदेश दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को सजा या हर्जाने के बजाय 25 फलदार वृक्ष लगाने और उसकी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। दरअसल, नीमच के रहने वाले आनंद मानवत ने वर्ष 2019 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर यह गंभीर सवाल उठाया था कि प्रदेश में लगातार चल रही सड़क निर्माण परियोजनाओं के चलते भारी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन उनकी जगह दोबारा पौधारोपण नहीं किया जा रहा है, जिससे गंभीर पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो रहा है। अपनी याचिका में उन्होंने राज्य सरकार द्वारा 24 सितंबर 2015 को जारी उस अधिसूचना को भी चुनौती दी थी, जिसके तहत 53 प्रकार के पेड़ों को बिना अनुमति और बिना ट्रांजिट परमिट के काटने की छूट दी गई थी।
⚖️ 2015 की अधिसूचना पहले ही हो चुकी है निरस्त, कोर्ट ने याचिकाकर्ता से मांगे थे आंकड़े
मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की 24 सितंबर 2015 वाली वह विवादास्पद अधिसूचना पहले ही 1 मार्च 2025 को तीन जजों की एक बड़ी बेंच द्वारा पूरी तरह निरस्त की जा चुकी है, इसलिए वर्तमान में उस पर चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं, जब कोर्ट ने 2019 में दायर की गई इस याचिका के संदर्भ में याचिकाकर्ता से पूछा कि उनके पास इस बात के क्या आंकड़े हैं कि इन वर्षों में सड़क परियोजनाओं के नाम पर कुल कितने पेड़ काटे गए हैं, तो याचिकाकर्ता के वकील इस संबंध में कोई ठोस जानकारी कोर्ट के सामने पेश नहीं कर सके।
🌱 'पर्यावरण सुधार सबकी जिम्मेदारी', नगर निगम द्वारा तय जगह पर लगाने होंगे पौधे
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए कहा कि चूँकि याचिका में पर्याप्त और पुख्ता आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए याचिकाकर्ता के पास भविष्य में पूरी जानकारी के साथ दोबारा अदालत आने का रास्ता खुला हुआ है। हालांकि, इस बीच पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कोर्ट ने याचिकाकर्ता आनंद मानवत को निर्देश दिए हैं कि वे नगर निगम द्वारा निर्धारित की गई जगह पर कुल 25 फलदार वृक्षों का रोपण करें और इसकी पूरी जानकारी अदालत को सौंपें। कोर्ट ने यह भी संदेश दिया कि पर्यावरण को सुरक्षित रखना और सुधारना केवल शासन-प्रशासन की ही नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
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