कनहरगांव और माचागोरा डैम में पानी की कमी से बढ़ी चिंता, सांसद ने दिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश

छिंदवाड़ा जिले में पर्याप्त बारिश न होने के कारण जल संकट गहराता जा रहा है। अधिकांश तालाब और जलाशय सूखे हैं, जिससे पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

Aug 24, 2026 - 14:55
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कनहरगांव और माचागोरा डैम में पानी की कमी से बढ़ी चिंता, सांसद ने दिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश

मध्य प्रदेश के कई इलाकों में इन दिनों भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं और शहरों में जलभराव के हालात बने हुए हैं। हालाँकि, कुछ चुनिंदा जिलों को छोड़ दिया जाए तो राज्य के अधिकांश हिस्सों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन छिंदवाड़ा जिले की स्थिति इस मामले में बेहद दयनीय बनी हुई है। यहाँ बारिश का मौसम होने के बावजूद अधिकांश जलस्रोत पानी को तरस रहे हैं, जिसका सीधा असर शहर की पेयजल सप्लाई पर पड़ रहा है। वर्तमान में छिंदवाड़ा में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जा रही है। मानसून का अब मुश्किल से एक महीना ही शेष बचा है, और यदि इस दौरान अच्छी बारिश से भरपाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह पेयजल संकट एक विकराल रूप धारण कर सकता है।

📊 प्रदेश के 39 जिलों में कम बारिश, छिंदवाड़ा में आधे से भी कम भरा पानी

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के 55 जिलों में से केवल 16 जिले ऐसे हैं जहाँ औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जबकि अन्य 39 जिलों में बारिश का आंकड़ा औसत से काफी पीछे है। बात करें छिंदवाड़ा की तो यहाँ मानसून का आधे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिले में अब तक मात्र 619 मिमी (यानी औसत की लगभग आधी) बारिश ही दर्ज हो पाई है। जिले के कुल 147 मीडियम व छोटे तालाबों में से 96 जलाशयों के कंठ अब भी पूरी तरह सूखे पड़े हैं, और बमुश्किल 51 तालाबों तक ही पानी पहुँच पाया है। हालात यह हैं कि बारिश के इस सीजन में भी कई इलाकों में टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई करनी पड़ रही है।

🏛️ सांसद और महापौर ने बुलाई बैठक, माचागोरा और कनहरगांव डैम को भरने की तैयारी

गहराते पेयजल संकट को देखते हुए सांसद बंटी विवेक साहू ने अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें माचागोरा डैम का पानी जल्द से जल्द चंदनगांव वाटर फिल्टर प्लांट तक लाने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, कनहरगांव डैम को 'संगम 2' योजना और अन्य जल स्रोतों से जोड़ने के लिए सर्वे करने को कहा गया है। महापौर विक्रम आहाके ने भी स्पष्ट किया कि पर्याप्त बारिश न होने के कारण मुख्य जल स्रोत पूरी तरह नहीं भर पाए हैं, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए नागरिकों को राहत देने के प्रयास लगातार जारी हैं। यदि आने वाले कुछ हफ्तों में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो प्रशासन के लिए जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती साबित होगा।

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