क्राइम ब्रांच टीआई ने मांगी 1 लाख 20 हजार की रिश्वत, लोकायुक्त ने की बड़ी कार्रवाई
इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने तत्कालीन क्राइम ब्रांच टीआई सुजीत श्रीवास्तव और अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। बेटे को छोड़ने के एवज में रिश्वत मांगी गई थी।
मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए इंदौर क्राइम ब्रांच के तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव सहित चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह पूरा मामला एक शिकायतकर्ता महिला के बेटे को क्राइम ब्रांच कार्यालय बुलाकर उस पर कार्रवाई न करने की एवज में एक लाख बीस हजार रुपये की रिश्वत मांगने से जुड़ा है। लोकायुक्त द्वारा की गई प्रारंभिक जांच और तकनीकी साक्ष्यों के सत्यापन के बाद 24 अगस्त को भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम और बीएनएस की धाराओं के तहत यह प्रकरण दर्ज किया गया है, जिससे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
💸 यूपीआई और नकदी के जरिए ली गई थी रिश्वत, लोकायुक्त को मिले थे तकनीकी साक्ष्य
लोकायुक्त पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, तुलसी नगर निवासी प्रीति हजारी ने गत 2 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बेटे प्रांजल हजारी को एक मामले के सिलसिले में क्राइम ब्रांच कार्यालय बुलाया गया था। इसके बाद मामले में कार्रवाई न करने और प्रांजल को छोड़ने के नाम पर तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव और तत्कालीन आरक्षक विकास सैंधव ने अन्य लोगों के साथ मिलकर 1,20,000 रुपये की रिश्वत वसूली। इसमें से 50,800 रुपये यूपीआई के जरिए दीपक पटेल नामक व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाए गए थे, जबकि शेष 70,000 रुपये नकद लिए गए थे। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए इन तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के निर्देशन में तस्दीक कराई गई, जिसमें मामला प्रथम दृष्टया सही पाया गया।
🛑 टीआई पहले ही हो चुके हैं लाइन अटैच, निजी लोगों के जरिए हो रहा था खेल
इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य केंद्र इंदौर का रीगल तिराहा स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय रहा है। लोकायुक्त पुलिस अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि रिश्वत की यह रकम किस तरह और किन परिस्थितियों में ली गई। इस मामले में जिन चार लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव, तत्कालीन आरक्षक विकास सैंधव के अलावा दीपक पटेल (जिसके खाते में पैसे डलवाए गए थे) और अभय सिंह (जो टीआई का निजी ड्राइवर था) शामिल हैं। एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया ने बताया कि सुजीत श्रीवास्तव को पहले ही एक अप्रैल 2026 को कोर्ट में समय पर फाइल सबमिट न करने के चलते लाइन अटैच कर दिया गया था और वे तभी से गैर-हाजिर चल रहे हैं। लोकायुक्त की इस बड़ी कार्रवाई के बाद विभाग के भीतर हड़कंप की स्थिति है।
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