छिंदवाड़ा से सिवनी तक 90 किमी सड़क होगी फोर लेन, कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव को मिलने की उम्मीद
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से सिवनी तक के नेशनल हाईवे 347 को फोर लेन बनाने की तैयारी है। इस पर लगभग 3500 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसे लेकर कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा।
मध्य प्रदेश के नेशनल हाईवे 347 यानी छिंदवाड़ा से सिवनी तक के रूट पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। सरकार अब इस व्यस्त रूट को फोर लेन में तब्दील करने जा रही है, जिस पर लगभग 3500 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। छिंदवाड़ा से सिवनी तक की करीब 90 किलोमीटर लंबी सड़क को चार लेन करने के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को आज होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि कैबिनेट इस पर अपनी मुहर लगा देगी। इस सड़क को फोर लेन किए जाने को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी पहले ही अपनी प्रतिबद्धता जता चुके हैं।
🚗 2 लेन की घुमावदार और खतरनाक सड़क से मिलेगा छुटकारा, लगातार बढ़ रहा था ट्रैफिक का दबाव
वर्तमान में छिंदवाड़ा से सिवनी के बीच केवल दो लेन की सड़क है, जबकि इस 70 किलोमीटर से अधिक लंबे नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव लगातार तेजी से बढ़ रहा है। इस रूट पर पैसेंजर कार यूनिट (PCU) का आकलन 10 हजार से भी ज्यादा दर्ज किया गया है। भारी ट्रैफिक और आए दिन होने वाली समस्याओं को देखते हुए इस रूट को टू लेन से बढ़ाकर 4 लेन किए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित होने जा रही कैबिनेट बैठक में इस सड़क चौड़ीकरण के प्रस्ताव को पेश किया जाएगा, जिसे हरी झंडी मिलने की पूरी उम्मीद है।
🌉 बनेंगे नए पुल और अंडरपास, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए खास 'कान्हा कॉरिडोर' भी होगा शामिल
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सिवनी-छिंदवाड़ा का यह रूट कई स्थानों पर काफी घुमावदार और जोखिम भरा है, इसलिए चौड़ीकरण के साथ इसके एलाइनमेंट में भी सुधार किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत लखनवाड़ा में बैनगंगा नदी पर नया पुल बनाया जाएगा और इसके पहले पेंच नदी पर बने पुराने पुल को भी चौड़ा किया जाएगा। इसके अलावा, दुर्घटनाओं की आशंका वाले क्षेत्रों को सुधारने के साथ-साथ इस 4 लेन मार्ग पर करीब 13 किलोमीटर की दूरी में 'कान्हा कॉरिडोर' प्रस्तावित किया गया है, जिसमें लगभग 3 किलोमीटर का हिस्सा अंडरपास वाला होगा। वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कॉरिडोर और अंडरपास को जोड़ा गया है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में इस रूट पर सड़क हादसों की संख्या में काफी इजाफा देखा गया है।
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