केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावितों से मिलेंगे राहुल गांधी, संभावित दौरे की आहट से जागा जिला प्रशासन
केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावितों से राहुल गांधी के संभावित मिलने की खबर के बाद छतरपुर प्रशासन सक्रिय हो गया है। कलेक्टर और एसपी ने गांवों का दौरा कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं।
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित विस्थापितों का लंबा आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस आंदोलन को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सक्रियता दिखाई है, और बीते दिनों दिल्ली पहुंचकर प्रभावितों के एक दल ने उनसे मुलाकात कर अपनी दर्दभरी दास्तां सुनाई थी। इस दौरान राहुल गांधी ने प्रभावित गांवों का दौरा करने का आश्वासन दिया था। अब जैसे ही राहुल गांधी के छतरपुर आने की सुगबुगाहट तेज हुई, जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में कलेक्टर मृणाल मीणा और एसपी रजत सकलेचा सहित तमाम बड़े अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर उनके त्वरित निराकरण का भरोसा दिलाया।
⛺ विस्थापितों की समस्याएं और कलेक्टर-एसपी का अनोखा अंदाज: जमीन पर दरी बिछाकर बैठे अधिकारी
केन-बेतवा परियोजना के कारण अपने घरों और जमीनों से बेदखल हुए किसान, आदिवासी और ग्रामीण लंबे समय से उचित मुआवजे और पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहे हैं। राहुल गांधी के संभावित दौरे की सूचना मिलते ही कलेक्टर मृणाल मीणा दल-बल के साथ सीधे ग्राम ढोढ़न और पलकौन्हा पहुंच गए। कलेक्टर ने विस्थापितों के घरों के दरवाजे खटखटाकर उन्हें बाहर बुलाया। इसके बाद किसी प्रोटोकॉल के बिना कलेक्टर और एसपी ने जमीन पर बिछाई गई दरी और चटाई पर ग्रामीणों के साथ बैठकर सीधे उनकी समस्याएं सुनीं और उनके दर्द को समझा।
💧 बुनियादी सुविधाओं का अभाव: पानी और आवास को लेकर ग्रामीणों का दर्द
विस्थापित महिला रामदेवी ने अधिकारियों को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि बारिश के मौसम में नए बसाए गए गांवों में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, और उन्हें पीने का पानी लाने के लिए एक किलोमीटर दूर तक भटकना पड़ता है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर कलेक्टर मृणाल मीणा ने अपील की कि जिन परिवारों को मुआवजा मिल चुका है, वे राशि का सदुपयोग कर प्राथमिकता से अपने नए मकानों का निर्माण शुरू करें और नियमों के तहत ही पात्र हितग्राहियों को पैकेज दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि ग्रामीण एक ही स्थान पर संयुक्त रूप से बसना चाहते हैं, तो प्रशासन उन्हें जमीन चिह्नित कर उपलब्ध कराएगा।
🏛️ धार्मिक स्थलों को ससम्मान शिफ्ट करने का वादा और विकास कार्यों के निर्देश
करौंदिया गांव में विस्थापित ग्रामीणों ने अब तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहने की बात उठाई, जिसके बाद कलेक्टर ने वहां महिला एवं बाल विकास अधिकारी को 48 घंटे के भीतर अस्थायी आंगनवाड़ी शुरू करने के निर्देश दिए। इसके अलावा स्वास्थ्य, बिजली, स्कूल और सड़कों की मरम्मत का काम तेजी से कराने के आदेश दिए गए। पेयजल के लिए जल जीवन मिशन के तहत हर घर सर्वे कराने की बात कही गई। सबसे खास बात यह रही कि प्रशासन ने आश्वासन दिया कि विस्थापित गांवों के धार्मिक स्थलों और देवी-देवताओं की मूर्तियों को पूरी सांस्कृतिक व धार्मिक मर्यादा के साथ उसी नए स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा, जहां ग्रामीण एक साथ बसना पसंद करेंगे।
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