मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर जेवर गिरवी रखवाए, भोपाल पुलिस ने दर्ज की FIR
भोपाल के कोलार इलाके में बुजुर्ग दंपती को 96 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 22 लाख रुपये की सायबर ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
राजधानी भोपाल के कोलार थाना क्षेत्र से सायबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां ठगों ने कोलार में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती को पूरे 96 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' की स्थिति में रखा। शातिर ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी, चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर और सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर दंपती को एक फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और तुरंत गिरफ्तार करने की धमकी दी। खौफ और मानसिक दबाव के कारण दंपती ने अपने कीमती जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपये की नकदी जुटाई और ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी रकम ऐंठने के बावजूद जालसाज लगातार वीडियो कॉल के जरिए उन पर अपनी पैनी नजर बनाए रखे।
📞 गिरफ्तारी वारंट का खौफ दिखाकर वीडियो कॉल पर पूछताछ और फर्जी जज की धमकी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, कोलार इलाके के कृष्णा कॉम्प्लेक्स (गणपति एन्क्लेव) में रहने वाले सुवर्णा लक्ष्मी और नरसिम्हा राव मूल रूप से आंध्र प्रदेश के पलनाडू जिले के रहने वाले हैं। बीते 19 मई को जब वे अपने शहर गए थे, तभी सुवर्णा लक्ष्मी के मोबाइल पर एक फोन आया। कॉलर ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का पुलिस अधिकारी 'मिस्टर खन्ना' बताते हुए धमकी दी कि उनके नाम से गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है और दिल्ली के केनरा बैंक खाते में नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करोड़ों का लेनदेन हुआ है। इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए उन्हें बंधकनुमा स्थिति में रखते हुए किसी से भी बात करने और घर से बाहर जाने पर रोक लगा दी। अगले दिन एक महिला ने खुद को चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताकर वित्तीय जानकारी ली और एक फर्जी जज से वीडियो कॉल पर बात करवाकर संपत्ति सीज करने का फर्जी आदेश सुना दिया।
💰 जेवर गिरवी रखकर जुटाए 22 लाख, 96 दिनों तक वीडियो कॉल की निगरानी में रहे दंपती
ठगों के दबाव में आकर दंपती 10 जून को आंध्र प्रदेश से भोपाल लौटे और 12 जून को अपने गहने गिरवी रखकर करीब 22 लाख रुपये का इंतजाम किया। यह पूरी रकम 5 अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई गई, जिसमें आरोपियों ने कुल 7 अलग-अलग व्हाट्सएप नंबरों का इस्तेमाल किया था। लगभग 19 मई से 23 अगस्त तक यानी पूरे 96 दिनों तक दंपती ठगों के वर्चुअल शिकंजे में कैद रहे। बाद में जब उन्हें शक हुआ और उन्होंने पड़ताल की, तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट के नाम पर दिखाया गया पूरा सेटअप फर्जी था। इसके बाद उन्होंने हिम्मत जुटाकर पुलिस से इसकी शिकायत की।
🔍 27 अगस्त को दर्ज हुई एफआईआर, व्हाट्सएप नंबरों और बैंक खातों की तकनीकी जांच में जुटी पुलिस
दंपती की शिकायत पर प्रारंभिक जांच के बाद 27 अगस्त को औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज कर ली गई, जिसके बाद मामले की केस डायरी कोलार थाने को ट्रांसफर कर दी गई। कोलार थाना प्रभारी संजय सोनी ने बताया कि पुलिस अब आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए सातों व्हाट्सएप नंबरों, वीडियो कॉल के माध्यमों और पांचों बैंक खातों के ट्रांजैक्शन ट्रेल की बारीकी से जांच कर रही है। ठगों के असली चेहरों और उनके बैंक खातों तक पहुंचने के लिए साइबर सेल की मदद से तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
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