रीवा के शासकीय गांधी मेमोरियल अस्पताल में जच्चा-बच्चा की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया पैसे मांगने और हत्या का आरोप

रीवा के जीएमएच अस्पताल में डिलीवरी के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सों पर पैसे मांगने और लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है।

Aug 28, 2026 - 15:19
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रीवा के शासकीय गांधी मेमोरियल अस्पताल में जच्चा-बच्चा की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया पैसे मांगने और हत्या का आरोप

मध्य प्रदेश के रीवा स्थित शासकीय गांधी मेमोरियल अस्पताल (GMH) से एक बेहद दर्दनाक और संदेहास्पद मामला सामने आया है। यहाँ डिलीवरी के लिए भर्ती कराई गई एक गर्भवती महिला अचानक लेबर वार्ड से रोते हुए बाहर आई और परिजनों से मदद की गुहार लगाने लगी। अगले ही पल उसकी और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि डॉक्टरों और नर्सों ने डिलीवरी के एवज में 30 हजार रुपये की मांग की थी और पैसे न मिलने पर उनकी बेटी की हत्या कर दी गई।

🛑 मृतका के पिता का आरोप: "नर्स ने कहा था पैसे दो वरना जहर का इंजेक्शन दे देंगे"

बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के हटवा ग्राम की रहने वाली कल्पना मिश्रा को लेबर पेन होने के बाद 25 अगस्त को जीएमएच अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मृतका के पिता रामशिरोमणि मिश्रा ने रोते हुए आरोप लगाया कि ऑपरेशन से ठीक पहले उनकी बेटी रोते हुए लेबर रूम से बाहर आई थी और उसने अपने पिता से कहा था, "ये लोग मुझे मार डालेंगे, मुझे बचा लो।" पिता का कहना है कि अस्पताल के स्टाफ ने पैसों की डिमांड की थी और एक नर्स ने यहां तक कह दिया था कि "इसके पास कुछ नहीं है, इसे यहां से हटा दो नहीं तो हम इसे जहर का इंजेक्शन दे देंगे।" परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन करने वाली डॉक्टर सोनल अग्रवाल प्रक्रिया के बाद तुरंत गायब हो गई और अस्पताल प्रबंधन अब दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहा है।

🏥 अस्पताल प्रबंधन का दावा: मानसिक विकार और हाई ब्लड प्रेशर के कारण बिगड़ी स्थिति

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है, लेकिन परिजनों के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मृतका के दस्तावेजों से पता चला कि उसकी प्रेगनेंसी के दौरान केवल दो बार ही निजी अस्पताल में जांच कराई गई थी, जबकि कम से कम आठ बार जांच होनी चाहिए थी। अधीक्षक ने दावा किया कि मस्तिष्क संबंधी विकार (ब्रेन डिसऑर्डर) और अत्यधिक ब्लड प्रेशर व हार्ट रेट बढ़ने के कारण महिला मानसिक रूप से नियंत्रण खो चुकी थी। वह अस्पताल में कभी गोल-गोल घूम रही थी तो कभी घबराकर भाग रही थी। डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन जच्चा और बच्चा दोनों को बचाया नहीं जा सका।

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