चाणक्यपुरी को जोड़ने वाले निर्माणाधीन ओवरब्रिज का तीखा मोड़ दे सकता है बड़े हादसों को दावत, स्थानीय लोगों में रोष

सीहोर में रेलवे फाटक 104 पर बन रहा 28 करोड़ का ओवरब्रिज अपने अत्यधिक घुमावदार डिजाइन के कारण विवादों में है। ब्यावरा हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

Aug 29, 2026 - 13:59
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चाणक्यपुरी को जोड़ने वाले निर्माणाधीन ओवरब्रिज का तीखा मोड़ दे सकता है बड़े हादसों को दावत, स्थानीय लोगों में रोष

मध्य प्रदेश के सीहोर शहर के व्यस्ततम पुराने इंदौर-भोपाल स्टेट हाईवे पर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास रेलवे फाटक क्रमांक 104 पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (RUB/ROB) शुरू होने से पहले ही गंभीर विवादों और तकनीकी खामियों के घेरे में आ गया है। करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस ओवरब्रिज का अत्यधिक घुमावदार और तीखा डिजाइन भविष्य में किसी बड़े सड़क हादसे का सबब बन सकता है। हाल ही में राजगढ़ जिले के ब्यावरा बायपास पर बने एक घुमावदार ब्रिज पर हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था, जहाँ एक स्लीपर बस तीखे मोड़ पर अनियंत्रित होकर सेफ्टी वॉल से घिसट गई थी और इस दुर्घटना में चार यात्रियों की दर्दनाक मौत जबकि 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस भयावह घटना के बाद अब सीहोर के इस नए ओवरब्रिज की सुरक्षा को लेकर शहरवासियों और वाहन चालकों के मन में भारी भय और आक्रोश व्याप्त है।

📐 इंजीनियरिंग की बड़ी चूक या निजी जमीन बचाने का खेल: ड्रोन तस्वीरों ने खोली पोल

यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट लगभग 700 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा है, जिसे कुल 24 मजबूत पिलरों पर खड़ा किया गया है। रेलवे ट्रैक से इसकी ऊंचाई करीब 7.30 मीटर रखी गई है। इस ब्रिज को बनाने का मुख्य उद्देश्य हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र को चाणक्यपुरी से जोड़ना और पुराने भोपाल-इंदौर मार्ग पर लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से आम जनता को निजात दिलाना था। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इस ब्रिज की जो रूपरेखा धरातल पर उतारी गई है, उसमें एक बेहद असामान्य और तीखा मोड़ दे दिया गया है। सामने आई ड्रोन कैमरों की तस्वीरों ने इस बड़ी लापरवाही की पूरी पोल खोल दी है। स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि प्लानिंग के वक्त अधिकारियों ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया। जहाँ ब्रिज का ढलान नीचे उतरना था, वहाँ निजी जमीनों का पेंच फंस रहा था, और कथित तौर पर निजी भूमि के अधिग्रहण से बचने या चहेतों को फायदा पहुँचाने के चक्कर में ब्रिज के मूल एलाइनमेंट से छेड़छाड़ कर इसे खतरनाक रूप से घुमावदार बना दिया गया।

⚠️ ब्यावरा हादसे जैसी पुनरावृत्ति की आशंका: ब्लैक स्पॉट बन सकता है नया ओवरब्रिज, लोड टेस्टिंग पूरी

यह पुराना और व्यस्त स्टेट हाईवे है, जहाँ दिन-रात भारी वाहनों, यात्री बसों और निजी गाड़ियों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में तेज गति से आने वाले अनजान वाहनों के लिए यह घुमावदार ब्रिज किसी खतरनाक 'ब्लैक स्पॉट' से कम साबित नहीं होगा। विशेषकर रात के समय या सर्दियों के कोहरे के दिनों में तीखे मोड़ पर चालकों का संतुलन बिगड़ने का खतरा सबसे अधिक रहेगा। जिस प्रकार ब्यावरा में चालक घुमाव का सही अंदाजा नहीं लगा सका था और बस कंक्रीट बाउंड्री से जा टकराई थी, ठीक वैसा ही गंभीर खतरा इस ब्रिज पर भी हर पल मंडराता रहेगा। हालांकि, ब्रिज कॉर्पोरेशन द्वारा हाल ही में इस पर लोड टेस्टिंग की औपचारिकता पूरी कर ली गई है, लेकिन धरातल पर सुरक्षा मानकों की हो रही इस खुली अनदेखी ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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