श्रावण मास में महाकाल के दर्शन करने पहुंचे 1.10 करोड़ से अधिक भक्त, अन्नक्षेत्र में लाखों ने ग्रहण की प्रसादी

उज्जैन के महाकाल मंदिर में सावन मास के दौरान 1.54 करोड़ से अधिक भक्तों ने दर्शन किए हैं। शीघ्र दर्शन और लड्डू प्रसाद बिक्री से मंदिर को करोड़ों की आय हुई है।

Aug 29, 2026 - 14:02
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श्रावण मास में महाकाल के दर्शन करने पहुंचे 1.10 करोड़ से अधिक भक्त, अन्नक्षेत्र में लाखों ने ग्रहण की प्रसादी

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकाल मंदिर में श्रावण मास के दौरान देश-विदेश से पहुंचे भक्तों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। मंदिर समिति द्वारा शुक्रवार शाम जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सावन के 30 दिनों में कुल 1 करोड़ 10 लाख 90 हजार 725 श्रद्धालुओं ने मंदिर के भीतर पहुंचकर राजाधिराज महाकाल के दर्शन किए। इसके अलावा, श्रावण-भाद्रपद मास में अब तक निकली भगवान महाकाल की चार भव्य सवारियों और नागपंचमी के अवसर पर नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 43 लाख 75 हजार दर्ज की गई। इस प्रकार मंदिर के भीतर और बाहर सवारी मार्ग पर दर्शन करने वाले कुल श्रद्धालुओं का यह आंकड़ा 1 करोड़ 54 लाख 65 हजार से अधिक पहुंच गया है। इसके साथ ही महाकाल अन्नक्षेत्र में 3 लाख 41 हजार से ज्यादा लोगों ने निशुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण की, जबकि शहर के पांच अलग-अलग स्थानों पर बनाए गए विशेष केंद्रों पर 2 लाख 71 हजार से अधिक कांवड़ यात्रियों ने महाप्रसादी का लाभ लिया।

💰 शीघ्र दर्शन व्यवस्था से 14.22 करोड़ और लड्डू प्रसादी की बिक्री से 10.32 करोड़ रुपये की बंपर आय

श्रावण मास के दौरान मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और आय में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शुरू की गई 'शीघ्र दर्शन' व्यवस्था के तहत कुल 5,66,350 टिकट जारी किए, जिससे मंदिर को अकेले 14 करोड़ 22 लाख 37 हजार 500 रुपये की आय प्राप्त हुई। वहीं, भगवान महाकाल की प्रसिद्ध लड्डू प्रसादी की भी इस दौरान रिकॉर्ड बिक्री हुई। समिति के अनुसार, एक महीने में कुल 2,180.662 क्विंटल लड्डू प्रसाद बिका, जिससे मंदिर को 10 करोड़ 32 लाख 73 हजार रुपये की आय हुई। यह दोनों ही स्रोत सावन माह में मंदिर प्रशासन के लिए राजस्व का सबसे बड़ा जरिया रहे।

❓ श्रद्धालुओं की गिनती के आंकड़ों को लेकर उठ रहे सवाल: पद्धति और डुप्लीकेशन पर स्पष्टता की मांग

महाकाल मंदिर समिति द्वारा जारी किए गए इन बड़े आंकड़ों को लेकर कुछ तकनीकी और तार्किक सवाल भी खड़े होने लगे हैं। मंदिर के गर्भगृह या परिसर में 1.10 करोड़ दर्शनार्थियों की संख्या तो हेड-काउंटिंग के माध्यम से दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन सवारी मार्ग और नागचंद्रेश्वर दर्शन के 43.75 लाख श्रद्धालुओं की संख्या किस आधार पर तय की गई है, इसे लेकर समिति ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। जानकारों का मानना है कि यह संख्या किसी तकनीकी काउंटिंग सिस्टम पर आधारित है या केवल एक अनुमान है, इसकी अधिकृत जानकारी सामने आनी चाहिए। साथ ही, इस बात पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि सवारी मार्ग पर शामिल होने वाले कितने श्रद्धालु पहले ही मंदिर के मुख्य दर्शन आंकड़ों में गिने जा चुके हैं ताकि आंकड़ों की प्रामाणिकता और पारदर्शिता बनी रहे।

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