उज्जैन में जमीन के नीचे तैयार हो रहा आधुनिक टनल नेटवर्क, 15 महीने में पूरा होगा प्रोजेक्ट
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में हरिफाटक पार्किंग से महाकाल लोक तक अंडरपास टनल का निर्माण शुरू हो गया है। जानें इस प्रोजेक्ट की खासियतें।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार है, जहाँ हर साल 13 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रावण, महाशिवरात्रि और सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों में यह संख्या करोड़ों तक पहुंच जाती है। सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने के अनुमान को देखते हुए सरकार ने यातायात और भीड़ नियंत्रण के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में कमिश्नर आशीष सिंह, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने हरिफाटक चौराहा पार्किंग से महाकाल लोक तक जमीन के नीचे (अंडरपास टनल) नया सफर तय करवाने के इस मेगा प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। लगभग 650 से 700 मीटर लंबी यह टनल सिंहस्थ से पहले बनकर तैयार होगी।
🚗 पैदल श्रद्धालुओं के साथ यातायात भी होगा डायवर्ट: बॉटनीलैक समस्या से मिलेगी मुक्ति
एसपी प्रदीप शर्मा के मुताबिक, इंदौर, रतलाम, आगर, देवास और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से आने वाले ट्रैफिक के कारण हरिफाटक चौराहे पर भारी दबाव रहता है, जिससे यह क्षेत्र 'बॉटनीलैक' बन जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए 90 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाला यह अंडरपास कनेक्शन बेहद अहम साबित होगा। सामान्य दिनों में भी यह वैकल्पिक यातायात कनेक्शन देगा। इस टनल के जरिए सामान्य श्रद्धालुओं और वीआईपी (VIP-VVIP) के रास्ते अलग किए जा सकेंगे, जिससे प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्था भी सुचारू बनी रहेगी। श्रद्धालु हरिफाटक क्षेत्र में अपना वाहन पार्क कर इस टनल के जरिए आसानी से महाकाल लोक आ-जा सकेंगे।
📐 कैसी होगी अंडरपास टनल की डिजाइन? दो बड़े बॉक्स और ड्रेनेज सिस्टम की सुविधा
सिंहस्थ सेल पीडब्ल्यूडी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अवनेंद्र सिंह ने बताया कि लगभग 650 से 700 मीटर लंबी इस टनल में दो बड़े बॉक्स होंगे, जो त्रिवेणी संग्रहालय (जयसिंहपुरा) के पास निकलेंगे। दोनों बॉक्स 9-9 मीटर चौड़े होंगे, जिनमें 7.50 मीटर का कैरिजवे (वाहनों के चलने का मुख्य हिस्सा) और दोनों तरफ 1.80 मीटर के फुटपाथ शामिल हैं। इसका डिजाइन केवल पैदल यात्रियों के लिए नहीं बल्कि वाहनों के आवागमन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके अलावा, बारिश के पानी की निकासी के लिए ऑटोमैटिक सेंसर्स और पंपयुक्त अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम बनाया जा रहा है, तथा हवा और रोशनी के लिए भी विशेष प्रावधान रखे गए हैं।
⏱️ अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य: रेलवे लाइन के नीचे होगा सबसे चुनौतीपूर्ण निर्माण
इस परियोजना के तहत जमीन के अंदर काम तेजी से चल रहा है और करीब 15 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसका सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा रेलवे लाइन के नीचे से गुजरने वाला क्षेत्र होगा, जिसका निर्माण रेलवे द्वारा ही किया जाएगा। इसके लिए राज्य शासन ने 31 करोड़ रुपये रेलवे को दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार इस पूरे प्रोजेक्ट की डेडलाइन 15 महीने यानी अप्रैल 2027 तय की गई है। इसके अलावा महाकाल मंदिर क्षेत्र में हेरिटेज होटल से शहनाई द्वार तक एक अन्य टनल का निर्माण भी चल रहा है, जिससे मंदिर परिसर में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को और अधिक सुविधा मिलेगी।
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