राष्ट्रपति चुनाव के लिए टीवी-रेडियो पर मुफ्त विज्ञापनों का दौर शुरू, जानिये क्या हैं नियम और समीकरण
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव का प्रचार तेज हो गया है। उम्मीदवार टीवी और रेडियो पर मुफ्त विज्ञापनों के जरिए जनता से वोट मांग रहे हैं।
ब्राजील में राष्ट्रपति पद के चुनाव का प्रचार अब और अधिक आक्रामक और तेज होने जा रहा है। शुक्रवार से राष्ट्रपति पद के दो प्रमुख दावेदार—वर्तमान राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो—टीवी और रेडियो पर मुफ्त विज्ञापनों के माध्यम से सीधे जनता से अपने पक्ष में वोट की अपील करेंगे। आज के डिजिटल युग और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बावजूद ब्राजील में टेलीविजन और रेडियो को चुनाव प्रचार का सबसे बड़ा और प्रभावी माध्यम माना जाता है। इन विज्ञापनों की पहुंच देश के दूर-दराज के इलाकों तक होती है, जिससे राष्ट्रीय मुद्दे आम नागरिकों के बीच मुख्य चर्चा का विषय बन जाते हैं। मौजूदा राष्ट्रपति लूला इस चुनाव में चौथी बार राष्ट्रपति बनने की उम्मीद के साथ उतर रहे हैं, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बड़े बेटे हैं, और दोनों ही नेता इस समय चुनावी सर्वे में लगभग बराबरी पर चल रहे हैं।
🗳️ क्यों खास है इस बार का मुकाबला और क्या हैं मुफ्त विज्ञापन के नियम?
राजनीतिक जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव प्रचार काफी तीखा और कटु हो सकता है। वर्ष 2022 का राष्ट्रपति चुनाव ब्राजील के इतिहास के सबसे कड़े मुकाबलों में से एक था, जिसमें लूला ने जायर बोल्सोनारो को बेहद कम अंतर से हराया था। ब्राजील के चुनावी नियमों के तहत राजनीतिक दलों को टीवी और रेडियो पर विज्ञापनों के लिए कोई भुगतान नहीं करना पड़ता है, बल्कि यह समय पार्टियों के आकार और निचले सदन में उनके प्रतिनिधित्व के आधार पर आवंटित किया जाता है। आगामी 4 अक्टूबर को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले टीवी और रेडियो चैनलों पर हर दिन करीब 14 मिनट का समय विज्ञापनों के लिए निर्धारित किया गया है, जिसमें लूला के गठबंधन को सबसे अधिक समय मिला है।
📱 सोशल मीडिया का बढ़ेगा दखल और दूसरे चरण के मुकाबले की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार के चुनावी विज्ञापनों पर सोशल मीडिया की कार्यशैली और ट्रेंड का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देगा। टीवी और रेडियो पर दिखाए जाने वाले विज्ञापन पारंपरिक रूप से बनावटी होने के बजाय अब अधिक सहज और जीवंत हो सकते हैं। प्रचार का एक हिस्सा अब डिजिटल और सोशल मीडिया सामग्री तैयार करने में भी खर्च किया जा रहा है। यदि यह मुकाबला सीधे पहले चरण में न सुलझकर रन-ऑफ यानी दूसरे दौर में पहुंचता है, तो 25 अक्टूबर को होने वाले फाइनल मुकाबले में दोनों ही प्रमुख उम्मीदवारों को प्रचार के लिए बिल्कुल बराबर समय मिलेगा, जिससे चुनावी सरगर्मी और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना है।
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