सेंटर फॉर कंपिटेंसी में विकसित होगी न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग और HLA टाइपिंग सुविधा, 1400 मरीज पंजीकृत
इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) में बच्चों के जन्म लेते ही सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग शुरू की जाएगी। केंद्र सरकार इस योजना में सहयोग कर रही है।
मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल में गंभीर समस्या बनी सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम और समय पर पहचान के लिए अब इंदौर में एक और महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसके तहत अब बच्चों के जन्म लेते ही उनकी सिकल सेल स्क्रीनिंग की जाएगी। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए इंदौर में केंद्र सरकार के विशेष सहयोग से एक अत्याधुनिक नोडल केंद्र विकसित किया जा रहा है। इंदौर के प्रसिद्ध महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MYH) स्थित 'सेंटर फॉर कंपिटेंसी फॉर सिकल सेल डिजीज' में इस बीमारी की शुरुआती स्तर पर ही पहचान करने के लिए नई व्यवस्थाओं की जोरदार तैयारी चल रही है।
👶 न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग से नहीं करना पड़ेगा लक्षणों का इंतजार, जन्म के समय ही होगी बीमारी की पहचान
अस्पताल के अधीक्षक एवं संयुक्त संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अशोक यादव के अनुसार, सेंटर में बड़े स्तर पर न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग शुरू करने की योजना है। हाल ही में केंद्र सरकार की एक उच्च स्तरीय टीम ने इस सेंटर की चिकित्सा सुविधाओं और कार्यप्रणाली का बारीकी से निरीक्षण किया है, और इस सुविधा के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता के साथ-साथ सभी जरूरी अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने का पूरा आश्वासन दिया है। इस स्क्रीनिंग के शुरू होने से नवजात शिशुओं में बीमारी के लक्षण प्रकट होने या स्थिति गंभीर होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि जन्म के तुरंत बाद जांच के जरिए ही सिकल सेल की मौजूदगी का पता लगाया जा सकेगा। इसका सबसे अधिक और सीधा लाभ मध्य प्रदेश के आदिवासी और सिकल सेल प्रभावित जिलों के बच्चों को मिलने की पूरी उम्मीद है।
🧬 एचएलए टाइपिंग सुविधा विकसित करने का प्रस्ताव, एमवायएच में पंजीकृत हैं 1400 से अधिक मरीज
डॉ. यादव ने बताया कि चूंकि गंभीर स्थिति वाले अधिकांश मरीज दूर-दराज के आदिवासी क्षेत्रों से रेफर होकर इस अस्पताल में पहुंचते हैं, इसलिए सेंटर में न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग के साथ-साथ 'HLA Typing' की सुविधा भी विकसित की जा रही है। इसके लिए एक संशोधित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है, जिसमें उपकरणों, रिएजेंट्स और अन्य संसाधनों की मांग शामिल है। वर्तमान में एमवायएच अस्पताल के इस विशेष सेंटर में सिकल सेल एनीमिया के करीब 1,400 मरीज पंजीकृत हैं, जिन्हें निरंतर उच्च स्तरीय चिकित्सा और उपचार दिया जा रहा है। इसके अलावा यहां 'रेड सेल एक्सचेंज' की उन्नत सुविधा भी उपलब्ध है, जो देश के चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में ही मिलती है। गौरतलब है कि राज्य के करीब 75 प्रतिशत सिकल सेल प्रभावित मरीज मुख्य रूप से अलीराजपुर, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, झाबुआ और डिंडौरी जैसे पांच प्रमुख आदिवासी जिलों से आते हैं, ऐसे में जन्म के समय होने वाली यह स्क्रीनिंग इस बीमारी के खात्मे में मील का पत्थर साबित होगी।
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