इंदौर के प्रसिद्ध खजराना मंदिर में सोलर पैनल की क्षमता बढ़ेगी, जीरो बिजली बिल का लक्ष्य

इंदौर का प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर अब सौर ऊर्जा के उपयोग से पूरी तरह आत्मनिर्भर और कार्बन एमिशन फ्री बनने जा रहा है। मंदिर में सोलर प्लांट की क्षमता बढ़ाई जाएगी।

Aug 29, 2026 - 16:55
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इंदौर के प्रसिद्ध खजराना मंदिर में सोलर पैनल की क्षमता बढ़ेगी, जीरो बिजली बिल का लक्ष्य

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध और आस्था के बड़े केंद्र इंदौर के खजराना गणेश मंदिर अब विद्युत उपयोग के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने जा रहा है। मंदिर परिसर में सूर्य की रोशनी और रूफटॉप सोलर पैनल के जरिए होने वाले बिजली उत्पादन से अब यह पवित्र स्थल दिन-रात जगमग रहेगा। अपनी बेहतरीन स्वच्छता और व्यवस्थाओं के लिए देश-विदेश में पहचाना जाने वाला खजराना गणेश मंदिर अब 'जीरो वेस्ट' मंदिर होने के साथ-साथ 'कार्बन एमिशन फ्री' (Carbon Emission Free) मंदिर के रूप में भी अपनी एक नई पहचान स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

⚡ हर महीने आता है 2 से ढाई लाख का बिजली बिल, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पहले लग चुका है प्लांट

वर्तमान में खजराना गणेश मंदिर परिसर, भोजनालय, जलापूर्ति के लिए संचालित आरओ प्लांट और अन्य प्रशासनिक कार्यों में जितनी बिजली खर्च होती है, उसका मासिक बिजली बिल लगभग 2 लाख से 2.5 लाख रुपये तक आता है। इस भारी-भरकम खर्च को कम करने के लिए वर्ष 2022 में ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मंदिर की छत पर 55 लाख रुपये की लागत से 150 किलोवॉट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया गया था। इस मौजूदा प्लांट से हर महीने लगभग 14,000 यूनिट बिजली का उत्पादन होता है, जिससे मंदिर के कुल बिजली बिल में से हर महीने करीब 90,000 रुपये की बचत हो रही है। अब नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल और मंदिर प्रबंध समिति के प्रमुख एवं कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशानुसार इस क्षमता को और अधिक बढ़ाने की तैयारी है ताकि बिजली का बिल पूरी तरह शून्य किया जा सके।

🌿 पहले से ही 'जीरो वेस्ट' है मंदिर: फूलों से बन रही खाद और धूपबत्ती

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के क्षेत्र में खजराना मंदिर पहले से ही एक मिसाल पेश कर रहा है। यह मंदिर पूरी तरह 'जीरो वेस्ट' जोन है, जहाँ सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा हुआ है। मंदिर परिसर में निकलने वाले फूलों और अन्य पूजन सामग्री का पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन किया जाता है। यहाँ गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करके फूलों से कंपोस्ट यूनिट के जरिए उच्च कोटि की जैविक खाद और धूपबत्ती का निर्माण किया जा रहा है। इस जैविक खाद का उपयोग नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न प्लांटेशन अभियानों में किया जाता है, जो इसे पर्यावरण के प्रति एक आदर्श धार्मिक स्थल बनाता है।

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