रतलाम में 2 करोड़ के नए भवन तैयार, फिर भी 3 महीने से किराए के मकान में चल रहे आदिम जाति आश्रम
रतलाम में 2 करोड़ की लागत से बने आदिवासी आश्रम भवन तैयार होने के बावजूद 3 महीने से खाली पड़े हैं और विभाग किराए के भवनों पर पैसे खर्च कर रहा है।
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों की उदासीनता और मनमर्जी के चलते सरकारी राशि का भारी अपव्यय हो रहा है। रतलाम जिले में करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से आदिवासी छात्रों के लिए बनाए जाने वाले आधुनिक आश्रम भवन पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं और निर्माण एजेंसी द्वारा ये भवन विभाग को हैंडओवर भी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद पिछले तीन महीनों से आदिम जाति कल्याण विभाग किराए के दो पुराने भवनों का संचालन कर रहा है और हर महीने उन पर 30-30 हजार यानी कुल 60 हजार रुपये का किराया चुका रहा है, जबकि खुद के नए और सुसज्जित भवन बेकार पड़े हैं।
⚖️ आदिम जाति कल्याण विभाग और पीआईयू के बीच रस्साकशी, बच्चों को नहीं किया गया शिफ्ट
रतलाम ग्रामीण क्षेत्र के पीपलखूंटा और रतलाम शहर के बिबड़ोद रोड पर 50-50 छात्रों की क्षमता वाले इन दोनों आश्रम भवनों का निर्माण लोक निर्माण विभाग की परियोजना कार्यान्वयन इकाई (PIU) द्वारा किया गया था। निर्माण पूरा होने के बाद पीआईयू ने ये बिल्डिंग्स विधिवत रूप से आदिम जाति कल्याण विभाग को सौंप दी थीं, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी आदिवासी बालक छात्रावासों को इन नए परिसरों में शिफ्ट नहीं किया गया है। विभाग की इस लापरवाही के कारण एक तरफ जहां हर महीने किराए के रूप में हजारों रुपये पानी की तरह बह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आदिवासी छात्रों को कम जगह वाले और असुविधाजनक किराए के मकानों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
🔍 निर्माण में खामियों का दावा और आदिवासी समाज की नाराजगी
इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए आदिम जाति कल्याण विभाग की सहायक आयुक्त प्रियंका राय का कहना है कि भवनों का हैंडओवर उनके पूर्व के अधिकारियों द्वारा लिया गया था, लेकिन जब उन्होंने मौके का निरीक्षण किया तो वहां निर्माण से जुड़ी कई खामियां पाई गईं। शहर के पास वाली बिल्डिंग के परिसर में ठेकेदार द्वारा बड़ा गड्ढा छोड़ दिया गया है जिसमें पानी भरने से हादसे का खतरा है, और इसे लेकर पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से चर्चा की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, पीआईयू के सीनियर इंजीनियर सचिन हरित का कहना है कि भवन पूरी तरह पूर्ण करके सौंपे गए थे और विभाग की तरफ से कभी कोई लिखित शिकायत या अधूरा निर्माण कार्य होने की बात नहीं बताई गई। इस आपसी खींचतान और प्रशासनिक लापरवाही से नाराज आदिवासी समाज के नेता किशन सिंगाड़ ने रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि असुविधाओं के बीच बच्चे परेशान हो रहे हैं, जिस पर जल्द ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।
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