सिंधु जल विवाद पर पाकिस्तान के पक्ष में आया हेग कोर्ट का फैसला, भारत ने कोर्ट को बताया अमान्य

हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय ने सिंधु जल विवाद पर फैसला सुनाते हुए भारत के निलंबन को गलत ठहराया है। भारत ने इस अंतरराष्ट्रीय कोर्ट को अमान्य करार दिया है।

Sep 01, 2026 - 14:35
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सिंधु जल विवाद पर पाकिस्तान के पक्ष में आया हेग कोर्ट का फैसला, भारत ने कोर्ट को बताया अमान्य

हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) ने बहुचर्चित सिंधु जल विवाद पर अपना फैसला सुना दिया है। पाँच जजों की इस बेंच ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत के निलंबन के आदेश को गलत करार दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि भारत चिनाब नदी पर जो जलविद्युत परियोजना तैयार कर रहा है, उसे तुरंत प्रभाव से रोक दिया जाए। हालांकि, भारत ने शुरू से ही इस मध्यस्थता न्यायालय के अस्तित्व को ही पूरी तरह अमान्य करार दिया है और स्पष्ट कर दिया है कि नई दिल्ली इस एकतरफा फैसले को मानने के लिए बिल्कुल भी बाध्य नहीं है।

🚫 भारत ने किया था कोर्ट की कार्रवाई का बहिष्कार, अकेले पाकिस्तान ने रखी अपनी दलील

विदित हो कि इस पूरे मामले में भारत शुरू से ही इस कोर्ट की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसकी सुनवाई में शामिल नहीं हुआ था, और अकेले पाकिस्तान ने ही इस पूरे मामले में अपनी कानूनी दलीलें पेश कीं। पाकिस्तान की पैरवी के लिए कोर्ट में 20 से अधिक वकीलों का दल पेश हुआ था। भारत का कड़ा रुख रहा है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, तब तक इस संधि को सामान्य रूप से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। कोर्ट ने भी आतंकवाद के मुद्दे को गंभीर माना, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के पास इस तरह के मामलों में सजा देने या पानी रोकने के आदेश को सही ठहराने का अधिकार नहीं है।

👥 जजों की निष्पक्षता पर उठे सवाल, अमेरिका और पाकिस्तान से जुड़े हैं बेंच के सदस्य

भारत द्वारा इस कोर्ट को खारिज करने के पीछे जजों की पृष्ठभूमि और उनकी निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। फैसला सुनाने वाली 5 जजों की इस बेंच में शामिल सदस्यों में से 2 जज अमेरिका से हैं, जबकि अन्य सदस्यों का भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान से पुराना जुड़ाव रहा है। चूंकि यह याचिका खुद पाकिस्तान द्वारा दायर की गई थी, इसलिए भारत ने इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और औचित्य पर गहरी आपत्ति जताई है। पैनल में सीन डी मर्फी, डब्लू वुट्रेट, जेफरी पी मिनियर, शौकत अल ख्शवानेह और डोनाल्ड ब्लैकमोरे जैसे नाम शामिल हैं, जिनका कूटनीतिक और पेशेवर करियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है।

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