नीट कोचिंग संस्थान की लूट से परेशान अभिभावक पहुंचे जनसुनवाई, 70 हजार के बदले सिर्फ 14 हजार लौटाने का ऑफर
रतलाम में एक निजी कोचिंग संस्थान की मनमानी सामने आई है। एडमिशन रद्द करवाने पर छात्रों को फीस रिफंड नहीं की जा रही है, जबकि फाइनेंस कंपनी से लिया गया लोन अभिभावक भर रहे हैं।
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से निजी कोचिंग संस्थानों की तानाशाही और मनमानी का एक बड़ा मामला सामने आया है। जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीण छात्र और उनके अभिभावक एक निजी कोचिंग संस्थान के खिलाफ अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। आरोप है कि नीट परीक्षा की तैयारी के लिए एडमिशन लेने वाले इन छात्रों ने जब कुछ ही दिनों बाद किन्हीं कारणों से संस्थान छोड़ दिया और अपना एडमिशन निरस्त करवाया, तो कोचिंग प्रबंधन ने जमा की गई पूरी राशि जब्त कर ली। हैरानी की बात यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर इन बच्चों को संस्थान ने ही फाइनेंस कंपनियों के जरिए 60 से 70 हजार रुपये का भारी-भरकम एजुकेशन लोन भी दिलवा दिया था।
💸 चार-पांच दिन पढ़ाई कर छोड़ा संस्थान, अब बिना कोर्स के भरनी पड़ रही लोन की भारी-भरकम किस्तें
ग्रामीण क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाले और रोजाना अप-डाउन करने में असमर्थ इन छात्रों ने जब कुछ ही दिनों में कोचिंग छोड़ दी, तो संस्थान ने अपनी पॉलिसी का हवाला देकर पैसे लौटाने से साफ मना कर दिया। एक अभिभावक मुकेश राठौर ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उन्होंने बेटी के लिए 20 हजार नकद और 50 हजार का लोन दिलवाया था, जिसकी पहली किस्त उनके खाते से कट भी चुकी है। अब कोचिंग संस्थान 70 हजार रुपये के बदले मात्र 14 हजार रुपये रिफंड करने की बात कह रहा है। वहीं एक अन्य छात्रा विनीता बोरिया का भी कहना है कि एक हफ्ता कोचिंग जाने के बाद एडमिशन रद्द कराने के बावजूद उन्हें चक्कर कटवाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंटों द्वारा लगातार किस्त चुकाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
⚖️ दोनों पक्षों को बुधवार को किया गया तलब, प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का दिया आश्वासन
इस पूरे मामले पर जब अभ्यास कोचिंग सेंटर के प्रबंधक विनीत सोनी से बात की गई, तो उनका कहना था कि फीस रिफंड का निर्णय कंपनी पॉलिसी के तहत कॉर्पोरेट ऑफिस द्वारा लिया जाता है। वहीं, जनसुनवाई कर रहे अधिकारी संजय शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बुधवार को छात्रों, अभिभावकों और कोचिंग संस्थान के प्रबंधन को अपने कार्यालय में तलब किया है। प्रशासन का कहना है कि दोनों पक्षों की पूरी बात सुनने के बाद नियमानुसार आवश्यक और सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, ताकि इन गरीब छात्रों के साथ हो रहे आर्थिक शोषण को रोका जा सके।
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