बारिश में टापू बन जाता है मझरा टोला पडसिला, प्रसूता को 2 किलोमीटर खाट पर ढोकर ले जाने को मजबूर हुए ग्रामीण
छतरपुर के बक्सवाहा विकासखंड में एंबुलेंस न मिलने पर गर्भवती महिला को 3 घंटे के इंतजार के बाद खटिया पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा। सड़क न होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण विकास के चाहे जितने भी दावे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी कई जगहों पर बेहद दर्दनाक और विचलित करने वाली है। ताजा मामला छतरपुर जिले के बक्सवाहा विकासखंड के अंतर्गत आने वाली पंचायत निमानी से सामने आया है, जहाँ बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर खटिया (खाट) पर लिटाकर अस्पताल ले जाना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि मदद के लिए एंबुलेंस को फोन किया गया था, लेकिन तीन घंटे लंबा इंतजार करने के बाद भी जब वाहन मौके पर नहीं पहुँचा, तो उन्हें मजबूरन यह कठिन कदम उठाना पड़ा।
🌧️ कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील, 2 किलोमीटर तक खाट पर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचे ग्रामीण
यह पूरी घटना जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित निमानी पंचायत के मझरा टोला पडसिला की है। यहाँ रहने वाली 30 वर्षीय गर्भवती महिला सुनीता भिलाला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद परिजनों ने जननी एक्सप्रेस (एंबुलेंस) को फोन कर इसकी सूचना दी। लेकिन, खराब रास्तों और प्रशासनिक उदासीनता के चलते वाहन तय समय पर नहीं पहुँचा। गांव तक पहुँचने वाला कच्चा रास्ता बारिश के कारण पूरी तरह से दलदल में तब्दील हो चुका था, जिसके चलते कोई भी चार पहिया वाहन वहां तक नहीं जा सका। ऐसे में थक-हारकर ग्रामीणों ने महिला को खाट पर लिटाया और लगभग 2 किलोमीटर तक दलदल भरे रास्ते से पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुँचाया, जहाँ से एक निजी वाहन की मदद से उसे बक्सवाहा अस्पताल ले जाया गया।
🏝️ बारिश में टापू बन जाता है गांव, वन विभाग के क्षेत्र में होने के कारण रुकी है सड़कों की कनेक्टिविटी
स्थानीय निवासी अनंत सिंह बारेला ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि सड़क न होने के कारण बरसात के मौसम में ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। कच्ची सड़क कीचड़ और दलदल बन जाती है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना लोहे के चने चबाने जैसा साबित होता है। वहीं, निमानी पंचायत के सचिव महेश शुक्ला का कहना है कि यह मझरा टोला पडसिला वन विभाग के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में स्थित है, जहाँ लगभग 8 से 10 आदिवासी परिवार रहते हैं और कुल आबादी 60 से 70 के आसपास है। बारिश के दिनों में गोरानाद सहित यह पूरा इलाका चारों तरफ से पानी से घिरकर एक टापू में तब्दील हो जाता है, जिससे बाहरी दुनिया से इनका संपर्क कट जाता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)