महंगाई से आम आदमी परेशान लेकिन गन्ना उत्पादक किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही है खेती

चीनी के दाम बढ़ने से नरसिंहपुर के गन्ना किसान बेहद खुश हैं। किसानों को उम्मीद है कि शक्कर महंगी होने से उन्हें गन्ने के अच्छे दाम मिलेंगे और उनकी आमदनी बढ़ेगी।

Sep 01, 2026 - 15:07
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महंगाई से आम आदमी परेशान लेकिन गन्ना उत्पादक किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही है खेती

इस समय देश भर में इस बात की चर्चा है कि चीनी के दाम बढ़कर 40 रुपये से लेकर 60-70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं। जहाँ एक ओर आम आदमी बढ़ती महंगाई से परेशान है, वहीं शक्कर और गुड़ के दाम बढ़ने की वजह से मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले का किसान बेहद खुश नजर आ रहा है। स्थानीय किसानों का मानना है कि यदि बाजार में चीनी के दाम तेज बने रहते हैं, तो गन्ने की खेती उनके लिए एक बार फिर से फायदे का बड़ा सौदा साबित होगी। जिले के किसान लंबे समय से यह इंतजार कर रहे थे कि शक्कर और गुड़ के भाव में तेजी आए, ताकि उन्हें उनकी फसल का बेहतर रिटर्न मिल सके।

💰 प्रति क्विंटल गन्ने के भाव बढ़ने की उम्मीद, एक एकड़ में होती है सीमित बचत

नरसिंहपुर के बघूवार गांव के किसान शैलेंद्र सिंह और अन्य किसानों का कहना है कि अभी तक शक्कर का थोक भाव कम होने के कारण गन्ने का उचित भाव नहीं मिल पाता था, जिससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही थी। वर्तमान में नरसिंहपुर में औसतन 400 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का भाव मिलता है और एक एकड़ में 250 से 300 क्विंटल तक गन्ना निकलता है, जिससे किसान सालभर में बमुश्किल 50 से 60 हजार रुपये ही बचा पाते हैं। किसानों का तर्क है कि यदि चीनी के दाम ऊंचे बने रहते हैं, तो गन्ने के दाम में भी 100 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी होनी चाहिए, जिससे किसानों को प्रति एकड़ 70 से 80 हजार रुपये की बचत हो सके।

🏭 गुड़ और शक्कर का बड़ा गढ़ है नरसिंहपुर, सरकार को मिलता है करोड़ों का राजस्व

नरसिंहपुर मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक जिला माना जाता है, जहाँ सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 75 हजार हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती की जाती है। इस जिले में लगभग 2 लाख टन गुड़ और 2 लाख टन शक्कर का उत्पादन किया जाता है, जिससे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से करीब चार लाख लोगों को रोजगार मिलता है। हालांकि, किसानों के सामने जंगली सूअरों द्वारा फसल नुकसान, कीड़ों के प्रकोप और सही बीज जैसी कई चुनौतियां भी बनी हुई हैं। अब किसानों की नजर इस बात पर टिकी है कि चीनी की यह तेजी तब तक बनी रहे जब तक उनकी फसल कटकर बाजार में आए, ताकि उन्हें इसका पूरा लाभ मिल सके।

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