2600 करोड़ की लागत से बन रहे उज्जैन-गरोठ हाइवे का निर्माण कार्य फिर विवादों में, दोबारा बनेगा क्षतिग्रस्त हिस्सा
उज्जैन-गरोठ हाइवे के निर्माण के दौरान 40 फीट ऊंची दीवार धंसने से एनएचएआई में हड़कंप मच गया है। 2600 करोड़ की लागत से बन रहे इस हाइवे के क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा बनाया जाएगा।
मध्य प्रदेश में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन-गरोठ हाइवे के निर्माण से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। हाइवे निर्माण के दौरान ब्रिज की करीब 40 से 45 फीट ऊंची और 50 मीटर लंबी दीवार अचानक धंस गई, जिससे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) में हड़कंप मच गया है। खास बात यह है कि इससे पहले भी इस हाइवे निर्माण के दौरान एक अन्य हिस्सा धंस चुका था। दूसरी बार इस तरह की गंभीर घटना सामने आने के बाद अब निर्माण एजेंसी के काम की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं, जिसका वीडियो स्थानीय ग्रामीणों ने बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है।
💰 2600 करोड़ की लागत से बन रहा है ग्रीनफील्ड मार्ग, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे को जोड़ेगा हाइवे
आगामी सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर उज्जैन को चारों दिशाओं से नेशनल हाइवे, स्टेट हाइवे और एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की बड़ी कवायद चल रही है। इसी योजना के तहत उज्जैन-गरोठ हाइवे का निर्माण 2600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया जा रहा है। एनएचएआई के माध्यम से एक निजी एजेंसी इस प्रोजेक्ट को पूरा कर रही है। यह हाइवे इसलिए बेहद खास और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे को आपस में जोड़ता है। गरोठ-उज्जैन का यह ग्रीनफील्ड मार्ग कुल 135 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से लगभग 129 किलोमीटर का मार्ग पहले ही आवागमन के लिए शुरू किया जा चुका है।
🛠️ IIT विशेषज्ञों की टीम ने किया निरीक्षण, क्षतिग्रस्त 500 मीटर हिस्से को दोबारा बनाने का लिया गया निर्णय
इस पूरे मामले पर एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर शिवम शर्मा ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में चंदेसरी के समीप 5 से 7 किलोमीटर के दायरे में हाइवे का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। गत 22 अगस्त को आईआईटी (IIT) दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर सहित विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय टीम ने इस क्षेत्र का निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने बताया कि हाइवे के क्षतिग्रस्त हुए 500 मीटर हिस्से को पूरी तरह खोलकर दोबारा से नए सिरे से बनाने का निर्णय लिया गया है, जिसे आगामी 31 मार्च 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा। यह मार्ग आगे चलकर देवास और इंदौर के हाइवे को भी जोड़ेगा, जिससे सिंहस्थ के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में सहूलियत मिलेगी।
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