MP Road Scam: मध्य प्रदेश में घटिया सड़क निर्माण का भंडाफोड़; ED की रेड में ₹55 करोड़ के फर्जी बिलों का खुलासा
मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण घोटाले का पर्दाफाश। ईडी की छापेमारी में 55 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी बिटुमेन बिल जब्त। घटिया सामग्री से बन रही थीं सड़कें।
जबलपुर। मध्य प्रदेश में सड़कें क्यों एक ही बारिश में उखड़ जाती हैं? इस सवाल का जवाब अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से मिल गया है। पिछले दिनों रीवा और जबलपुर में सड़क ठेकेदारों के ठिकानों पर ईडी के छापे के बाद एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। ठेकेदारों ने सरकारी तेल कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) के नाम पर 55.60 करोड़ रुपये के फर्जी बिल लगाए, जबकि हकीकत में सड़कों के निर्माण में लोकल मार्केट से खरीदा गया घटिया बिटुमेन (डामर) इस्तेमाल किया जा रहा था।
🔎 बिल हाई क्वालिटी का, माल लो क्वालिटी का
लंबे समय से मध्य प्रदेश में सड़कों की बदहाली और उनकी कम उम्र को लेकर शिकायतें आ रही थीं। विशेष रूप से एमपीआरडीसी और ग्रामीण सड़क निर्माण प्राधिकरण की सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे थे। जांच में पाया गया कि ठेकेदारों ने कागजों पर तो नामी कंपनियों का डामर दिखाया, लेकिन जमीन पर सबसे निचले स्तर की सामग्री का उपयोग किया। यह पूरा खेल फर्जी बिलों के माध्यम से संचालित किया जा रहा था।
⚖️ ईडी की कार्रवाई और जब्ती
ईडी के भोपाल जोनल कार्यालय ने 19 जून को कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के तहत 23.50 लाख रुपये नकद, महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। साथ ही, ठेकेदारों के 2.93 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट को भी फ्रीज कर दिया गया है। यह जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।
🧐 अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
फिलहाल इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन जांच जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि जिन सरकारी अधिकारियों ने इन बिलों को पास किया, उन्होंने निर्माण के समय सड़कों की लैब रिपोर्ट क्यों नहीं देखी? क्या बिटुमेन की गुणवत्ता का परीक्षण नहीं किया गया था? फिलहाल यह मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भी विचाराधीन है, जिससे दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।
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