छिंदवाड़ा में अनोखा पोला पर्व, बैलों की खातिरदारी और फैशन शो का आयोजन, सजेगी प्रतियोगिता
छिंदवाड़ा में किसानों का प्रमुख पर्व पोला धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन बैलों की विशेष पूजा, खातिरदारी और आकर्षक सजावट के साथ फैशन शो का आयोजन होता है।
भादो मास की अमावस्या का दिन देश के अन्नदाताओं और उनके सबसे वफादार साथी यानी बैलों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होता है। इस दिन किसान अपने खेत के सबसे मेहनती साथी को धन्यवाद देने के लिए सुबह से ही उनकी खातिरदारी में जुट जाते हैं। छिंदवाड़ा और पांढुर्ना क्षेत्र में महाराष्ट्र की सीमा से जुड़ी इस प्राचीन परंपरा को आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जा रहा है। इस दिन किसान अपने बैलों को नदी-तालाबों में नहलाकर रंग-बिरंगे कपड़ों और विशेष झूल से सजाते हैं, जिसके बाद उनकी पूजा कर उन्हें घर के बने पकवान खिलाए जाते हैं।
🎉 बैलों का फैशन शो और घरों में बनती हैं गुजिया, खुरमा व पापड़ी
पोला पर्व के मौके पर छिंदवाड़ा के पोला ग्राउंड में एक अनूठी और आकर्षक प्रतियोगिता आयोजित की जाती है, जिसे बैलों का 'फैशन शो' भी कहा जाता है। इसमें किसान अपने सबसे स्वस्थ और सुंदर बैलों को सजा-धजाकर लाते हैं, और सबसे सुंदर जोड़ी को सार्वजनिक पोला उत्सव समिति द्वारा सम्मानित किया जाता है। समिति के अध्यक्ष विजय पांडे बताते हैं कि आधुनिक खेती और ट्रैक्टरों के दौर में पशुधन कम होने के कारण इस परंपरा को बचाने के लिए पिछले 16 वर्षों से यह आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा घरों में महिलाएं सुबह से ही बैलों के लिए बेसन की पापड़ी, खुरमा और गुजिया तैयार करती हैं, और बच्चे लकड़ी के बैलों के साथ पारंपरिक 'गुढ़ी' खेलने घर-घर जाते हैं।
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