दो दशक के लंबे इंतजार के बाद जागी उम्मीद, खेल मंत्री विश्वास सारंग ने की बड़ी घोषणा

उज्जैन में मलखंब और जिमनास्टिक अकादमी के लिए 111.33 करोड़ रुपये का नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। 20 एकड़ में बनने वाले इस सेंटर से खिलाड़ियों को आधुनिक ट्रेनिंग मिलेगी।

Sep 06, 2026 - 17:35
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दो दशक के लंबे इंतजार के बाद जागी उम्मीद, खेल मंत्री विश्वास सारंग ने की बड़ी घोषणा

मलखंब के खेल में देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखने वाले उज्जैन शहर को आखिरकार एक आधुनिक और स्थायी अकादमी मिलने की उम्मीद जग गई है। हालांकि उज्जैन को मलखंब की नर्सरी कहा जाता है, लेकिन विडंबना यह रही है कि यहाँ एक स्थायी अकादमी का सपना पिछले दो दशकों से अधूरा पड़ा था। साल 2006 से शुरू हुई घोषणाओं और बैठकों का दौर अब वर्ष 2026 में एक बड़े वित्तीय प्रस्ताव तक जा पहुंचा है। खेल मंत्री विश्वास सारंग द्वारा 20 एकड़ जमीन पर मलखंब एवं जिमनास्टिक अकादमी के लिए 111.33 करोड़ रुपये के विस्तृत प्रस्ताव की घोषणा की गई है, जिसमें 86 करोड़ निर्माण कार्य और 25.33 करोड़ संचालन पर खर्च किए जाएंगे।

🏆 विक्रम और द्रोणाचार्य पुरस्कारों का इतिहास रहा है उज्जैन के नाम

उज्जैन के खेल इतिहास में मलखंब की जड़ें बेहद गहरी हैं। साल 1972-73 में मनोहर लाल झाला को मिले विक्रम पुरस्कार से शुरू हुई यह परंपरा किशोरीशरण श्रीवास्तव, केशव झाला, और हाल ही में मुन्नालाल मामोडिया, चंद्रशेखर चौहान व पूजा मालवीय तक पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही है। वर्ष 2020 में उज्जैन के मलखंब कोच योगेश मालवीय को देश का पहला द्रोणाचार्य पुरस्कार (नियमित श्रेणी) मिलने से इस खेल को राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐतिहासिक पहचान मिली। इसके अलावा प्रभाष जोशी पुरस्कार और एकलव्य पुरस्कारों में भी यहाँ के खिलाड़ियों ने लगातार परचम लहराया है। हाल ही में खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने 10 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

🏢 70 खिलाड़ियों को मिलेगी हॉस्टल, फिटनेस और फिजियोथैरेपी की आधुनिक सुविधाएं

तैयार किए गए नए प्रस्ताव के तहत इस आधुनिक सेंटर में कुल 70 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों (35 बालक, 15 बालिका, 15 डे-बोर्डिंग बालक और 5 डे-बोर्डिंग बालिका) को चुना जाएगा, जिनका चयन प्रदेशभर से टैलेंट सर्च के जरिए होगा। इन खिलाड़ियों को हॉस्टल, आधुनिक खेल उपकरण, फिटनेस, फिजियोथैरेपी और खेल विज्ञान (Sports Science) आधारित उच्चस्तरीय ट्रेनिंग दी जाएगी। जब तक स्थायी भवन बनकर तैयार नहीं होता, तब तक उज्जैन के राजमाता खेल परिसर नानाखेड़ा से डे-बोर्डिंग मॉडल पर ट्रेनिंग शुरू करने की योजना है, जिसमें शुरुआती चरण में 40 खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

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