मध्य प्रदेश में अलनीनो के असर के बीच अच्छी खबर, बड़े बांध 70% से ज्यादा भरे, पानी की चिंता हुई दूर
मध्य प्रदेश में औसत से 6 फीसदी कम बारिश के बावजूद बड़े बांध 70% से ज्यादा भर चुके हैं। अलीराजपुर में सबसे कम तो मऊगंज में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज हुई है।
मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अलनीनो के प्रभावों के बीच प्रदेशवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। भले ही राज्य में समग्र रूप से औसत से 6 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई हो, लेकिन जल संरचनाओं और बड़े बांधों में भरपूर पानी पहुँचने से आगामी दिनों के लिए पानी की चिंता काफी हद तक दूर हो गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में सबसे अच्छी बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में अभी भी झमाझम बारिश का इंतजार बना हुआ है।
📊 सबसे ज्यादा और सबसे कम बारिश वाले जिलों की स्थिति
मौसम रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में सबसे अधिक बारिश वाले शीर्ष जिलों में मऊगंज (1349.6 मिमी), सतना (1245.3 मिमी), निवाड़ी (1133.7 मिमी), शहडोल (1088.6 मिमी) और सीधी (1069.7 मिमी) शामिल हैं, जो सभी पूर्वी क्षेत्र में आते हैं। इसके विपरीत, सबसे कम बारिश वाले जिलों में अलीराजपुर सबसे ऊपर है जहाँ औसत से 54 फीसदी कम (महज 345.5 मिमी) बारिश हुई है। इसके अलावा धार में 41 फीसदी, बड़वानी में, झाबुआ में 36 फीसदी और मुरैना में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इंदौर, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा और उज्जैन जैसे जिलों में भी औसत से 20 से 27 फीसदी तक कम पानी गिरा है।
🌊 बड़े बांधों का पेट हुआ फुल, बरगी और बाणसागर से लगातार छोड़ा जा रहा पानी
नदियां और बांध लबालब होने से राज्य के जल संकट पर बड़ा विराम लगा है। प्रदेश के प्रमुख बांधों में बाणसागर 97.89%, बरगी बांध 89.37%, इंदिरा सागर 79.71%, तवा बांध 72.67% और गांधी सागर बांध 69.33% तक भर चुका है। पानी का स्तर अधिक होने के कारण बरगी, राजघाट, कुंडलिया और मड़ीखेड़ा समेत कई बांधों के गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। बरगी के 13 गेट खुलने से 3802 क्यूमेक्स पानी छोड़ा गया है, जो तवा और इंदिरा सागर में पहुँच रहा है। इसके अलावा भोपाल का कलियासोत और ग्वालियर-मुरैना के कई छोटे-बड़े जलाशय भी पूरी तरह भरकर ओवरफ्लो हो रहे हैं।
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