शिक्षकों से भरवाया जा रहा ऑनलाइन सहमति पत्र, सर्वर और डिजिटल डेटा सुरक्षा को लेकर गरमाई सियासत
मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की नई ई-अटेंडेंस व्यवस्था के खिलाफ साढ़े तीन लाख शिक्षक उतर आए हैं। डिजिटल डेटा सुरक्षा और सहमति पत्र को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लागू की जा रही ई-अटेंडेंस व्यवस्था ने अब एक बड़े और गंभीर विवाद का रूप ले लिया है। इस नई प्रणाली के विरोध में प्रदेश भर के करीब साढ़े तीन लाख से अधिक शिक्षक पूरी तरह लामबंद हो गए हैं। शिक्षकों के इस भारी विरोध की मुख्य वजह हाजिरी के लिए जबरन भरवाया जा रहा वह ऑनलाइन सहमति पत्र है, जिसमें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 का हवाला दिया गया है। शिक्षक संगठनों को डर है कि इस प्रक्रिया से उनका निजी डेटा लीक या चोरी हो सकता है और उन्होंने इस पूरी डिजिटल प्रणाली में थर्ड पार्टी की संलिप्तता पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
🔒 डेटा सुरक्षा पर उठे सवाल और 'परिवेदना पोर्टल' पर अटकी 18 हजार शिकायतों से शिक्षकों में आक्रोश
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ई-अटेंडेंस 3.0 का पोर्टल किसी सुरक्षित सरकारी डोमेन ('gov.in' या 'nic.in') पर संचालित हो रहा है या नहीं। शिक्षकों की मांग है कि सर्वर की लोकेशन और साइबर सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, क्योंकि इसके जरिए शिक्षकों की लाइव लोकेशन, मोबाइल नंबर और सर्विस रिकॉर्ड जैसी संवेदनशील जानकारियां सुरक्षित नहीं हैं। एक तरफ जहां हाजिरी को लेकर इतनी जल्दबाजी दिखाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों के 'परिवेदना पोर्टल' पर सेवा संबंधी लगभग 18,000 शिकायतें आज भी धूल फांक रही हैं, जिससे शिक्षकों में सरकार और विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
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