उज्जैन में 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार जमींदोज, 2 करोड़ खर्च के बाद भी गिरा प्राचीन ढांचा
उज्जैन में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत दो करोड़ खर्च करने के बाद 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार ढह गया है। प्रशासनिक लापरवाही पर उठे बड़े सवाल।
उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर के उत्तर में स्थित 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक ‘महाकाल द्वार’ शनिवार-रविवार की दरमियानी रात अचानक ढह गया। जिस विरासत को सहेजने के नाम पर महज तीन साल पहले (वर्ष 2021-22 में) स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत दो करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई थी, वह अधिकारियों और ठेकेदारों की घोर लापरवाही के कारण मलबे में तब्दील हो गया। पर्यटन विभाग के 'सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल' पहुंच मार्ग और वीआइपी मूवमेंट के लिए पुराने महाकाल थाना भवन को तोड़कर मार्ग बनाया जा रहा था, जिसके दौरान बिना किसी सुरक्षात्मक उपाय के भारी जेसीबी से गहरी खोदाई की गई थी।
📜 2600 साल पुरानी द्वार परंपरा और सिंधिया राजकाल का इतिहास, अब विशेषज्ञों की देखरेख में होगा नवनिर्माण
प्रसिद्ध पुराविद् डॉ. रमन सोलंकी के अनुसार उज्जैन में द्वार की यह परंपरा करीब 2600 साल पुरानी है, जिसने अशोक मौर्य, सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज का काल भी देखा है। सन 1732 में सिंधिया राजपरिवार के सचिव बाबा रमाचंद्र शैणवी ने इस द्वार का जीर्णोद्धार कराया था, जो अब बेसराल्ट पत्थर और ईंटों के कटाव तथा बारिश के कारण धराशायी हो गया। इस बीच, राज्य शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड की नई सीईओ के रूप में नेहा जैन की नियुक्ति कर दी है, जिन्होंने स्पष्ट किया है कि पुरातत्व विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में इस प्राचीन धरोहर का पुनः नवनिर्माण कराया जाएगा।
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