ज्यादा पानी और यूरिया का अधिक इस्तेमाल बन सकता है फसल की बर्बादी का कारण, जानिए सही तरीका
शहडोल में लगातार भारी बारिश के चलते धान की फसल में शीथ ब्लाइट (अंगमारी) रोग का खतरा बढ़ गया है। कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को बचाव और यूरिया के सही इस्तेमाल की सलाह दी है।
मध्य प्रदेश के शहडोल और आसपास के इलाकों में कम बारिश के बाद अचानक हुई भारी बारिश अब किसानों की अन्नदाता फसलों के लिए आफत बनती जा रही है। जिस धान की फसल को बेहतर बढ़वार के लिए पानी की जरूरत होती है, अतिवृष्टि के कारण खेतों में जलभराव होने से उसमें कई प्रकार की बीमारियां पनपने लगी हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय खेतों में पानी ठहरने और उमस बढ़ने से धान की फसल में 'शीथ ब्लाइट' यानी अंगमारी रोग का गंभीर खतरा पैदा हो गया है, जिससे समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो किसानों को 25 से 75 प्रतिशत तक का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
🛡️ शीथ ब्लाइट के लक्षण और बचाव: खेतों में पानी की निकासी रखें चालू और संभलकर करें यूरिया का इस्तेमाल
कृषि वैज्ञानिक डॉ. नितिन सिंघई ने बताया कि इस रोग में पौधे की जमीन से 4 से 6 इंच की ऊंचाई पर गहरे कत्थे या हल्के भूरे रंग के धब्बे पड़ने लगते हैं और फसल में गलन की समस्या शुरू हो जाती है। इस फफूंद जनित रोग से बचने के लिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में पानी को जबरन रोककर न रखें, बल्कि पानी के आने-जाने का रास्ता खुला रहने दें। इसके साथ ही, धान की फसल में अत्यधिक यूरिया (एक बार में 40-50 किलो की जगह 15-20 किलो प्रति एकड़) डालने से बचें और जरूरत पड़ने पर टॉप ड्रेसिंग का तरीका अपनाएं। रोग के लक्षण दिखते ही कृषि विशेषज्ञों की सलाह से फफूंदनाशक दवा का छिड़काव पौधे के नीचे से ऊपर तक अच्छी तरह करें।
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