सड़क चौड़ीकरण की जद में आया 200 साल पुराना मंदिर, जनभावनाओं के आगे असमंजस में प्रशासन
उज्जैन में सिंहस्थ मार्ग चौड़ीकरण के चलते खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन का मामला 10 दिन से अटका है। जनभावनाओं और तकनीकी जांच के बीच प्रशासन कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है।
उज्जैन में छत्री चौक के समीप स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर को पुनर्स्थापित करने का मामला दस दिन बीत जाने के बाद भी अनिर्णय की स्थिति में बना हुआ है। सिंहस्थ महाकुंभ के मद्देनजर कंठाल चौराहा से छत्रीचौक तक मार्ग चौड़ीकरण की जद में आए इस प्राचीन मंदिर को हटाने या वहीं रहने देने को लेकर शासन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाया है। इस बीच, आईआईटी इंदौर की टीम ने विशेष उपकरणों की मदद से हनुमान जी की प्रतिमा की गहराई और संरचना की जांच शुरू कर दी है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
👥 मंदिर के पास उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, हनुमान चालीसा पाठ जारी—पुरातत्वविदों ने बताई इंटरलॉकिंग तकनीक की बात
मूर्ति विस्थापन में हो रही देरी के बीच मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और सुबह से देर रात तक लोग हनुमान चालीसा व रामायण का पाठ कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार खड़े हनुमान की यह मूर्ति परमार काल की और करीब एक हजार साल पुरानी है, जिसे इंटरलॉकिंग तकनीक से स्थापित किया गया था। पुरातत्वविदों का सुझाव है कि आधुनिक जीपीआर (ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार) तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से मूर्ति को सुरक्षित निकाला जा सकता है, लेकिन भक्तों की आस्था और दक्षिण से उत्तर दिशा में मुख बदलने को लेकर उठ रहे सवालों के कारण मामला काफी संवेदनशील हो गया है।
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