मोहन भागवत अब मेरी भाषा बोल रहे हैं, आरएसएस प्रमुख के बयान पर बोले वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने रीवा में बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि युवावस्था में आरएसएस उन्हें अपने साथ जोड़ना चाहता था। साथ ही उन्होंने मोहन भागवत के बयान की सराहना की है।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने रीवा में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा है कि अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत में उन्हें जनसंघ और आरएसएस अपने साथ जोड़ना चाहते थे। उन्होंने बताया कि जब वे महज 22 साल की उम्र में नगर पालिका अध्यक्ष चुने गए थे, तब राजमाता विजयाराजे सिंधिया गुना से सांसद थीं और उस दौर में जनसंघ के बड़े नेता कैलाश सारंग व कुशाभाऊ ठाकरे उन्हें अपने साथ दौरे पर ले गए थे। हालांकि, जनसंघ की विचारधारा उन्हें समझ नहीं आई और उन्होंने राजमाता से साफ मना कर दिया, जिसके बाद वे वर्ष 1972 में पूरी तरह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए।
🤝 मोहन भागवत अब मेरी भाषा बोल रहे हैं, अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट पर भी उठाए गंभीर सवाल
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि भागवत अब वही बातें कह रहे हैं जो वे 1972 से अपने भाषणों में कहते आ रहे हैं। उन्होंने भागवत के उस बयान को सराहनीय बताया जिसमें कहा गया था कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहता। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी पर धार्मिक उन्माद फैलाने का आरोप लगाया और अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2000 से 3000 करोड़ रुपये के चंदे में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने मांग की कि उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर ही केंद्र सरकार को अयोध्या राम मंदिर के संचालन के लिए भी विशेष कानून या एक्ट बनाना चाहिए।
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