जबलपुर में सांप्रदायिक सद्भाव की अनूठी मिसाल, मुस्लिम समाजसेवी इनायत अली ने हिंदू महिला का कराया अंतिम संस्कार
जबलपुर में आर्थिक तंगी के कारण एक गरीब पति पत्नी का अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहा था। समाजसेवी इनायत अली ने आगे आकर पूरे रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराया।
आज के दौर में जब समाज में आपसी दूरियां और भेदभाव की खबरें अक्सर सामने आती हैं, वहीं मध्य प्रदेश के जबलपुर से इंसानियत और भाईचारे की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो दिल को छू लेने वाली है। जबलपुर जिला अस्पताल में इलाज के दौरान एक गरीब महिला की मौत हो गई, लेकिन अत्यधिक गरीबी के कारण उसका पति अंतिम संस्कार का खर्च उठाने में असमर्थ था। लाचार होकर वह व्यक्ति अपनी पत्नी के शव को नर्मदा नदी में प्रवाहित करने की तैयारी कर रहा था, तभी शहर के समाजसेवी इनायत अली मसीहा बनकर आगे आए और उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज के साथ पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया।
💔 आर्थिक तंगी के चलते नहीं थे अंतिम संस्कार के पैसे, समाजसेवी ने आगे बढ़कर निभाई इंसानियत की मिसाल
शहपुरा की रहने वाली आरती विश्वकर्मा का कुछ दिनों पूर्व एक्सीडेंट हो गया था, जिनके पति श्याम विश्वकर्मा एक होटल में बर्तन धोने का काम कर परिवार चलाते हैं। अस्पताल में इलाज के दौरान आरती की मौत के बाद जब श्याम के पास अंतिम संस्कार के लिए जरूरी पांच हजार रुपये नहीं जुटे और किसी ने मदद नहीं की, तो वह शव को नर्मदा में बहाने की सोचने लगा। इस बात की भनक लगते ही समाजसेवी इनायत अली ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया। इनायत अली का कहना है कि वे लंबे समय से लाचार लोगों की सेवा कर रहे हैं, और इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।
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