पीजी छोड़ते समय किन बातों का रखें ध्यान, जानें दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के बाद पीजी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। जानिए किराएदारों के कानूनी अधिकार।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की दर्दनाक घटना ने किराए के मकानों और पीजी (PG) में रहने वाले लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद एक और बड़ा मुद्दा सोशल मीडिया के जरिए सामने आया है, जहां कुछ पीजी मालिक असुरक्षित मानी जा रही इमारतों को खाली करने वाले छात्रों को उनका सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security Deposit) वापस करने से साफ इनकार कर रहे हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि यदि आप भी किसी पीजी में रहते हैं या कमरा खाली कर रहे हैं, तो कानूनन आपके क्या अधिकार हैं और इस तरह के विवादों से कैसे निपटा जा सकता है।
📜 क्या पीजी मालिक रोक सकता है सिक्योरिटी? जानिए एग्रीमेंट के नियम और दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला
नियमों के मुताबिक, सिक्योरिटी डिपॉजिट सिर्फ इसलिए नहीं रोका जा सकता कि किरायेदार ने पीजी छोड़ दिया है। मकान मालिक केवल बकाया किराया, बिजली-पानी का बिल या किरायेदार द्वारा पहुंचाए गए नुकसान जैसी जायज रकम ही काट सकता है, सामान्य टूट-फूट के नाम पर पैसे काटना गलत है। पीजी लेते समय हमेशा लिखित एग्रीमेंट होना चाहिए जिसमें डिपॉजिट लौटाने की समयसीमा और शर्तें साफ दर्ज हों। मार्च 2024 के एक फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया था कि लीज खत्म होने पर या जगह खाली करने के तुरंत बाद वैध कटौतियां करके सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस किया जाना चाहिए। यदि पीजी मालिक पैसे देने से मना करे, तो लिखित मांग, कानूनी नोटिस या पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का विकल्प किराएदार के पास होता है।
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