ई-हियरिंग सपोर्ट न करने पर भड़की युगलपीठ, टीसीएस या इंफोसिस से स्वतंत्र ऑडिट कराने के आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की नई वेबसाइट में आ रही तकनीकी दिक्कतों और ई-हियरिंग में बाधा पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है। आईटी स्टाफ पर कार्रवाई और स्वतंत्र ऑडिट के आदेश दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की नई वेबसाइट में लगातार आ रही तकनीकी दिक्कतों और कामकाज में आ रही बाधा पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हाईकोर्ट की नई वेबसाइट ई-हियरिंग को बिल्कुल भी सपोर्ट नहीं कर रही है और इसमें गंभीर तकनीकी गड़बड़ियां हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि आईटी स्टाफ की कार्यप्रणाली और नाकाबिलियत के कारण न्यायिक प्रक्रिया में वकीलों और जजों का बहुमूल्य कानूनी समय बर्बाद हो रहा है। इसके साथ ही युगलपीठ ने अपने आदेश में मुख्य न्यायाधीश से संबंधित आईटी स्टाफ के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
🔍 टीसीएस, इंफोसिस या एलएंडटी से कराया जाएगा स्वतंत्र ऑडिट, 30 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान जब यह तकनीकी समस्या सामने आई, तो रजिस्ट्रार आईटी केएस कुशवाहा को कोर्ट में बुलाकर उनके सामने ही सिस्टम की जांच की गई, जिसमें बफरिंग और हैंगिंग की गंभीर दिक्कतें स्पष्ट रूप से नजर आईं। कोर्ट में उपस्थित अधिवक्ताओं ने भी यह बात रखी कि पुरानी वेबसाइट इसके मुकाबले कहीं बेहतर और सुचारू थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए युगलपीठ ने टीसीएस (TCS), इंफोसिस या एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के विशेषज्ञों के साथ-साथ सी-डॉट (C-DAC) के अधिकारियों द्वारा मप्र हाईकोर्ट के आईटी सिस्टम का स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस तीसरे पक्ष के ऑडिट को 30 दिन में पूरा कर अदालत के समक्ष रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
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